हिमालय की गोद में स्थित उत्तराखंड के पवित्र चारधाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। नवंबर माह के मध्य में शीतकाल के लिए चारों धामों के कपाट बंद होने की तिथियां निर्धारित हो चुकी हैं, जिसके चलते प्रातः काल की कड़ाके की ठंड के बावजूद धामों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है।
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और चारधाम प्रशासन द्वारा घोषित तिथियों के अनुसार, अन्नकूट पर्व पर 10 नवंबर को गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके अगले दिन 11 नवंबर, भाई दूज के पावन अवसर पर ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग बाबा केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बंद होंगे, जबकि बैकुंठ धाम बद्रीनाथ के कपाट 16 नवंबर की रात्रि 9 बजकर 37 मिनट पर बंद किए जाएंगे।
मंगलवार प्रातः केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में तापमान शून्य के करीब होने के बावजूद तड़के चार बजे से ही भक्तों ने अलकनंदा और मंदाकिनी के तट पर आस्था की डुबकी लगाई। ब्रह्म मुहूर्त में महाभिषेक और मंगला आरती के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव और बद्री विशाल के जयकारे लगाए। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी के बीच भक्ति की यह आभा देखते ही बन रही है।
कपाट बंद होने की प्रक्रिया के अंतर्गत होने वाली पारंपरिक पंचमुखी डोली यात्रा और शीतकालीन गद्दीस्थलों—ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर, पांडुकेश्वर, मुखबा और खरसाली में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। जब छह माह के लिए उच्च हिमालयी धामों के कपाट बंद हो जाते हैं, तब इन्हीं शीतकालीन प्रवास स्थलों पर देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न की जाती है।
यात्रा के अंतिम दिनों में बढ़ती भीड़ और बदलते मौसम को देखते हुए मंदिर प्रशासन व राज्य सरकार ने तीर्थयात्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। श्रद्धालुओं को पर्याप्त गर्म कपड़े साथ रखने, स्वास्थ्य जांच कराने और पंजीकरण नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है, ताकि शीतकाल से पूर्व प्रत्येक भक्त अपनी यात्रा निर्विघ्न रूप से पूर्ण कर सके।