आज 1 नवंबर, रविवार के दिन नक्षत्रों के राजा माने जाने वाले पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बनने से अत्यंत फलदायी 'रवि पुष्य योग' का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में रविवार के दिन पड़ने वाले पुष्य नक्षत्र को सर्वार्थ सिद्धिदायक और समृद्धि देने वाला माना गया है। कार्तिक मास के इस पावन दिन पर साध्य और शुभ योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे आज के दिन किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान, मंत्र सिद्धि और दान-पुण्य का महत्व कई गुना बढ़ गया है। देशभर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना और हवन का आयोजन किया जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि पुष्य योग में स्वर्ण, रजत, वाहन, भूमि, भवन और नई वस्तुओं की खरीदारी करना चिरस्थायी समृद्धि लेकर आता है। दीपावली के आगामी महापर्व से पूर्व पड़े इस विशेष मुहूर्त को देखते हुए बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जो लोग किसी नए व्यापार की शुरुआत करना चाहते हैं या महत्वपूर्ण निवेश की योजना बना रहे हैं, उनके लिए आज का दिन अत्यंत श्रेष्ठ है। इस योग में खरीदी गई वस्तुएं लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करती हैं।

आज के दिन भगवान सूर्यदेव और माता लक्ष्मी की संयुक्त आराधना का विशेष विधान बताया गया है। प्रातः काल तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य देने से आरोग्य, मान-सम्मान और तेज की प्राप्ति होती है। साथ ही, शाम के समय मुख्य द्वार और तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाकर श्रीसूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से घर में सुख-शांति और आर्थिक संपन्नता का वास होता है।
