दीपोत्सव की रौनक बाजारों में सज चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस के दिन की गई एक छोटी सी चूक आपकी साल भर की मेहनत और बरकत पर भारी पड़ सकती है? इस साल 6 नवंबर को मनाए जा रहे धनतेरस के महापर्व पर ग्रहों का एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें सही मुहूर्त पर की गई छोटी सी खरीदारी भी तेरह गुना फल देगी। वहीं, कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं जिन्हें इस दिन घर लाना अशुभ माना जाता है। आखिर क्या है इस बार पूजा का सबसे सटीक समय और कौन सी साधारण चीज आपके घर में मां लक्ष्मी को आकर्षित कर सकती है? आइए जानते हैं विस्तार से।

धनतेरस 2026: 6 नवंबर को मनाया जाएगा सुख-समृद्धि का महापर्व, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और क्या खरीदना रहेगा सबसे शुभ
पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस के पावन पर्व के साथ होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस (धनत्रयोदशी) मनाया जाता है। इस साल यह महापर्व 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह दिन केवल धन और वैभव की प्राप्ति का ही नहीं, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना का भी प्रतीक है।
धनतेरस का पौराणिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन को 'राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ-साथ धन की देवी मां लक्ष्मी, धन के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर और मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती और परिवार के सदस्यों को आरोग्य की प्राप्ति होती है।

तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष त्रयोदशी तिथि का आरंभ 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर होगा और इसका समापन अगले दिन 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 46 मिनट पर होगा। धनतेरस की पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के समय) में करने का विधान है, इसलिए 6 नवंबर की शाम को ही पूजा और दीपदान किया जाएगा।
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 5:30 बजे से रात 8:08 बजे तक (अवधि: लगभग 2 घंटे 38 मिनट)
वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 6:02 बजे से रात 7:58 बजे तकखरीदारी का शुभ समय: 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से त्रयोदशी तिथि शुरू होने के साथ ही पूरे दिन और शाम को खरीदारी का शुभ संयोग रहेगा।

धनतेरस पर क्या खरीदें?
मान्यता है कि धनतेरस के दिन खरीदी गई किसी भी वस्तु में तेरह गुना वृद्धि होती है। इस दिन कुछ विशेष चीजों की खरीदारी अत्यंत शुभ मानी जाती है:
सोना-चांदी और बर्तन: आर्थिक संपन्नता के लिए सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के या पीतल, तांबे और कांसे के बर्तन खरीदना सबसे उत्तम माना जाता है।
झाड़ू: धनतेरस पर सींक या फूल वाली झाड़ू खरीदना मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। यह घर से दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है।
साबुत धनिया और नमक: इस दिन साबुत धनिया खरीदकर पूजा में अर्पित करने और बाद में उसे तिजोरी या गमले में बोने से घर में बरकत बनी रहती है। साथ ही, नया नमक खरीदने से घर के वास्तु दोष समाप्त होते हैं।
गोमती चक्र और कौड़ियां: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूजा की सामग्री में गोमती चक्र और पीली कौड़ियां जरूर शामिल करनी चाहिए।

इन चीजों की खरीदारी से बचें
धनतेरस के दिन लोहे, एल्युमिनियम, स्टील या प्लास्टिक के बर्तन खरीदने से बचना चाहिए। लोहे को शनि का कारक माना जाता है, जिसे इस दिन घर लाना शुभ नहीं समझा जाता। इसके अलावा कांच का सामान, नुकीली या धारदार वस्तुएं (जैसे चाकू, कैंची) और काले रंग की वस्तुएं खरीदने से भी परहेज करना चाहिए।
यम दीपदान का महत्व
धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के निमित्त चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है। आटे से बने इस दीपक में सरसों का तेल डालकर जलाया जाता है। मान्यता है कि 'यम दीपदान' करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति का वास होता है।
धनतेरस का यह पावन पर्व हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक धन हमारा स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली है। शुभ मुहूर्त में की गई पूजा और सात्विक भाव से की गई खरीदारी आपके घर-आंगन को सुख, समृद्धि और आरोग्य से आलोकित करती है।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। हमारा उद्देश्य केवल पाठकों तक सूचना पहुंचाना है, किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या रूढ़िवादिता को बढ़ावा देना नहीं। इसके पूर्णतः सत्य और सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। किसी भी उपाय, मुहूर्त या नियम को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या विद्वान ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें।
