नई दिल्ली. भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है। राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के तहत देश भर के विभिन्न मठों, मंदिरों और निजी संग्रहालयों में रखी करीब एक लाख दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य इन विलुप्त हो रहे ग्रंथों को भविष्य की पीढ़ियों और वैश्विक शोधकर्ताओं के लिए सुरक्षित करना है।
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, योग और वेदांत से जुड़ी उन पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। इसके लिए अत्याधुनिक स्कैनिंग तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है ताकि प्राचीन लिपियों को आसानी से पढ़ा और अनुवादित किया जा सके। इस कार्य में देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों के संस्कृत, पाली और प्राकृत भाषा के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
इस डिजिटल संग्रह को एक राष्ट्रीय पोर्टल पर मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे आम जनता भी अपने गौरवशाली इतिहास और शास्त्रों से जुड़ सके। सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि यह न केवल हमारे पारंपरिक ज्ञान को बचाएगा, बल्कि विश्व पटल पर भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System) को भी एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।