सनातन धर्म में सबसे पवित्र माने जाने वाले कार्तिक मास के चलते इन दिनों हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी और उज्जैन सहित देश के तमाम प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आज रविवार का अवकाश और पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग होने के कारण ब्रह्म मुहूर्त से ही पवित्र नदियों के घाटों पर 'हर-हर गंगे' और भगवान विष्णु के जयकारे गूंजने लगे। कड़ाके की गुलाबी ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

पौराणिक शास्त्रों और पद्म पुराण के अनुसार, कार्तिक मास में श्रीहरि विष्णु जल में निवास करते हैं, इसलिए इस महीने में सूर्योदय से पूर्व किए गए स्नान का फल सहस्रों यज्ञों के समान बताया गया है। तीर्थ नगरी में कल्पवास और कार्तिक स्नान कर रहे श्रद्धालु प्रतिदिन तुलसी पूजन, भागवत कथा श्रवण और भजन-कीर्तन में लीन हैं। मंदिरों में सुबह की मंगला आरती से लेकर शयन आरती तक भक्तों का तांता लगा हुआ है और जगह-जगह अन्नदान व वस्त्रदान के शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
कार्तिक मास में संध्याकालीन दीपदान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिसे देखते हुए शाम ढलते ही नदियों के घाट हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठते हैं। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक माह में नदी किनारे, मंदिरों, पीपल और तुलसी के नीचे दीप प्रज्वलित करने से जीवन का अंधकार दूर होता है और पितरों को भी सद्गति प्राप्त होती है। प्रशासन द्वारा भी बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रमुख घाटों और मंदिरों में सुरक्षा व स्वच्छता के विशेष प्रबंध किए गए हैं।
