कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की नवमी के साथ ही देश भर में आगामी प्रमुख व्रतों और पंच दिवसीय दीपोत्सव की तैयारियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। महज दो दिन बाद 5 नवंबर, गुरुवार को पवित्र 'रंभा एकादशी' का व्रत रखा जाएगा, जिसके ठीक बाद गोवत्स द्वादशी और धनतेरस के साथ महापर्व दीपावली का शुभारंभ हो जाएगा। मंदिरों और घरों में साफ-सफाई, रंग-रोगन और बंदनवार सजाने का कार्य तेजी से चल रहा है।
सनातन परंपरा में कार्तिक मास की रंभा एकादशी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा और उपवास करने से मनुष्य को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है तथा घर में सुख-सौभाग्य का वास होता है। वैष्णव संप्रदाय के मंदिरों, विशेषकर मथुरा, वृंदावन और द्वारका में एकादशी के विशेष अभिषेक और रात्रि जागरण की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पंच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर, शुक्रवार को धनतेरस और प्रदोष व्रत के शुभ संयोग के साथ होगी। इसके पश्चात 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) और मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी, जबकि 8 नवंबर, रविवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ महालक्ष्मी पूजन और दीपावली का महापर्व मनाया जाएगा।
दीपोत्सव की इसी श्रृंखला में 9 और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव तथा 11 नवंबर को भाई दूज का पावन पर्व मनाया जाएगा। प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में दीपोत्सव को ऐतिहासिक बनाने के लिए सरयू के घाटों पर लाखों दीपों को सजाने का कार्य स्वयंसेवकों द्वारा शुरू कर दिया गया है। वहीं काशी, उज्जैन और हरिद्वार के मंदिरों को भी रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया जा रहा है।
प्रातः काल से ही देश के प्रमुख बाजारों में पूजन सामग्री, मिट्टी के दीयों, भगवान गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाओं और धार्मिक पुस्तकों की खरीदारी के लिए भक्तों की चहल-पहल बढ़ गई है। मंदिर समितियों और प्रशासन ने आगामी त्योहारों की भीड़ को देखते हुए दर्शन की नई समय-सारणी और सुरक्षा व्यवस्था लागू करना शुरू कर दिया है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन प्राप्त हो सकें।