अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक समीकरणों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों के संकेतों के बीच भारतीय शेयर और कमोडिटी बाजार में सधा हुआ कारोबार देखने को मिल रहा है। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों की दिशा और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर उभरते बाजारों (Emerging Markets) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के प्रवाह पर पड़ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और म्यूचुअल फंड्स में रिटेल निवेशकों के मजबूत एसआईपी (SIP) प्रवाह ने भारतीय शेयर बाजार को बड़ा सहारा दिया है। हर महीने हजारों करोड़ रुपये का घरेलू निवेश बाजार में आने से बड़े की गिरावट थम रही है, जो भारतीय पूंजी बाजार की बढ़ती परिपक्वता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
कमोडिटी बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड (कच्चे तेल) की कीमतों में नरमी और स्थिरता भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है। कच्चे तेल के दाम नियंत्रण में रहने से देश के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को सीमित रखने में मदद मिलती है और पेंट, एविएशन, टायर तथा केमिकल सेक्टर की कंपनियों की लागत कम होती है।
वहीं, सुरक्षित निवेश की मांग के चलते सोने और चांदी की कीमतों में ऊपरी स्तरों पर हलचल बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नजर खाद्य मुद्रास्फीति और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर टिकी है, ताकि देश में महंगाई को नियंत्रित रखते हुए आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखा जा सके।
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