आज 7 नवंबर 2026, दिन शनिवार है। सनातन धर्म में किसी भी नए, शुभ और मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से पहले दैनिक पंचांग का अवलोकन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के पांच प्रमुख अंगों—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण—की सटीक गणना से दिन के शुभ और अशुभ समय का ज्ञान होता है। आज शनिवार के दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है, जिसके चलते आज काली चौदस, संकटमोचन हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं आज के संपूर्ण पंचांग, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और शुभ-अशुभ मुहूर्त का संक्षिप्त विवरण:
संवत्सर, मास और तिथि का विवरण
हिंदू पंचांग के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थी नाम संवत्सर) और शक संवत 1948 (पराभव) चल रहा है। पूर्णिमांत गणना के अनुसार यह कार्तिक मास है, जबकि अमांत पद्धति के अनुसार आश्विन मास जारी है और प्रविष्टे (गते) 22 है। आज दक्षिणायन के अंतर्गत हेमंत ऋतु (वैदिक शरद ऋतु) का प्रभाव रहेगा। तिथि की बात करें तो आज कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रातः 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। इसके तुरंत बाद चतुर्दशी तिथि का शुभारंभ हो जाएगा, जो कल यानी 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 28 मिनट तक व्याप्त रहेगी।
नक्षत्र, योग और करण की स्थिति
आज के नक्षत्र मंडल पर दृष्टि डालें तो चित्रा नक्षत्र आज पूरे दिन और पूरी रात्रि रहते हुए कल 8 नवंबर की प्रातः 05 बजकर 52 मिनट तक रहेगा, जिसके पश्चात स्वाति नक्षत्र का प्रवेश होगा। योग की गणना के अनुसार, आज प्रीति योग रात्रि (8 नवंबर तड़के) 03 बजकर 28 मिनट तक बना रहेगा और इसके बाद आयुष्मान योग प्रारंभ होगा, जो दोनों ही शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं। करण की बात करें तो प्रातः 10 बजकर 47 मिनट तक वणिज करण रहेगा, उसके बाद रात्रि 11 बजकर 04 मिनट तक विष्टि (भद्रा) करण और तत्पश्चात शकुनि करण लग जाएगा।
सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों का गोचर
आज प्रातः सूर्योदय का समय 06 बजकर 37 मिनट पर और सायंकाल सूर्यास्त का समय 05 बजकर 32 मिनट पर निर्धारित है। वहीं आज चंद्रास्त सायं 04 बजकर 02 मिनट पर होगा तथा चंद्रोदय 8 नवंबर की प्रातः 05 बजकर 41 मिनट पर होगा। ग्रहों के राशिचक्र के अनुसार, सूर्य देव वर्तमान में तुला राशि और विशाखा नक्षत्र में विराजमान हैं। चंद्रमा आज सायं 05 बजकर 15 मिनट तक कन्या राशि में संचार करेंगे और इसके उपरांत तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे।

आज के विशेष शुभ मुहूर्त
किसी भी महत्वपूर्ण कार्य, खरीदारी या धार्मिक अनुष्ठान को प्रारंभ करने के लिए आज कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। आज ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 53 मिनट से 05 बजकर 45 मिनट तक और प्रातः संध्या का समय सुबह 05 बजकर 19 मिनट से 06 बजकर 37 मिनट तक रहा। दिन का सबसे श्रेष्ठ 'अभिजित मुहूर्त' प्रातः 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 54 मिनट से 02 बजकर 37 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त सायं 05 बजकर 32 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। रात्रि में अमृत काल रात 11 बजकर 10 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा, जबकि काली चौदस और मासिक शिवरात्रि पूजन के लिए 'निशिता काल मुहूर्त' रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
राहुकाल और आज का अशुभ समय
शास्त्रों के अनुसार अशुभ समय और राहुकाल के दौरान किसी भी नए व्यवसाय, यात्रा या मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। आज शनिवार को राहुकाल प्रातः 09 बजकर 21 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल प्रातः 06 बजकर 37 मिनट से 07 बजकर 59 मिनट तक और यमगण्ड काल दोपहर 01 बजकर 26 मिनट से 02 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। आज प्रातः 10 बजकर 47 मिनट से रात्रि 11 बजकर 04 मिनट तक भद्रा का भी साया रहेगा, वहीं वर्ज्य काल दोपहर 01 बजकर 06 मिनट से 02 बजकर 47 मिनट तक है। आज पूर्व दिशा में 'दिशा शूल' रहेगा, इसलिए पूर्व दिशा की यात्रा टालें; यदि यात्रा अत्यंत आवश्यक हो तो अदरक या उड़द का सेवन करके और हनुमान जी का स्मरण कर प्रस्थान करें।
दिन और रात्रि का चौघड़िया मुहूर्त
दिन के चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार आज प्रातः 07 बजकर 59 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक 'शुभ' का चौघड़िया रहेगा। इसके बाद दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 01 बजकर 26 मिनट तक 'चर' (सामान्य), दोपहर 01 बजकर 26 मिनट से 02 बजकर 48 मिनट तक 'लाभ' (उन्नति) और दोपहर 02 बजकर 48 मिनट से सायं 04 बजकर 10 मिनट तक 'अमृत' (सर्वोत्तम) का चौघड़िया रहेगा। वहीं रात्रि के चौघड़िया में सायं 05 बजकर 32 मिनट से रात्रि 07 बजकर 10 मिनट तक 'लाभ', रात्रि 08 बजकर 48 मिनट से 10 बजकर 27 मिनट तक 'शुभ' और रात्रि 10 बजकर 27 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 05 मिनट तक 'अमृत' का चौघड़िया अत्यंत फलदायी रहेगा।
आज के पर्व, व्रत और धार्मिक उपाय
चूंकि चतुर्दशी तिथि आज रात्रि निशीथ काल में व्याप्त है, इसलिए काली चौदस, हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि का व्रत व पूजन आज ही किया जाएगा (जबकि रूप चौदस और नरक चतुर्दशी का अरुणोदय स्नान कल 8 नवंबर को प्रातः काल होगा)। आज शनिवार और चतुर्दशी के संयोग में श्री हनुमान जी को सिंदूर व चमेली के तेल का चोला चढ़ाना, सुंदरकांड का पाठ करना और शनिदेव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाना सभी कष्टों व शनि दोषों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। साथ ही आज सायंकाल घर के मुख्य द्वार और दक्षिण दिशा में यम के निमित्त दीपदान करें तथा रात्रि में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में प्रस्तुत दैनिक पंचांग, मुहूर्त और ज्योतिषीय गणनाएं वैदिक ज्योतिष तथा दृक पंचांग के मानक सिद्धांतों पर आधारित हैं। भौगोलिक स्थिति और स्थानीय सूर्योदय के समय के अनुसार विभिन्न शहरों के मुहूर्त में कुछ मिनटों का आंशिक अंतर हो सकता है। किसी भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान, व्रत या बड़े निर्णय से पूर्व अपने स्थानीय पुरोहित अथवा विद्वान ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।