धनतेरस की खरीदारी तो हो गई, अब शादियों के सीजन में रहें सतर्क! सोने के पीछे 'चीनी पाउडर' का काला खेल; एसिड टेस्ट भी फेल, जानें कैसे बचाएं अपनी गाढ़ी कमाई
धनतेरस और दिवाली पर सोने की जमकर खरीदारी हो चुकी है, लेकिन बाजार में सोने की मांग अभी थमी नहीं है। आगे शादियों का सीजन और अन्य शुभ अवसर आ रहे हैं, जिनमें लोग अपने परिवार के भविष्य के लिए सोने के गहने खरीदते हैं। लेकिन क्या हो, जब आपको पता चले कि जिस तिजोरी में आप खरा सोना समझकर अपनी जीवनभर की पूंजी रख रहे हैं, वह असल में मिलावट का एक शातिर छलावा है? मध्य प्रदेश के इंदौर से लेकर देश के बड़े सराफा बाजारों तक एक ऐसे सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है, जो शुद्ध सोने के नाम और दाम पर ग्राहकों को 'डुप्लीकेट गोल्ड पाउडर' बेच रहा है। यह धोखाधड़ी इतनी हाई-टेक और शातिर है कि सोने की परख करने वाला पारंपरिक 'एसिड टेस्ट' भी इसके आगे घुटने टेक देता है। ऐसे में धनतेरस पर खरीदे गए सोने की जांच कराने और आगे की खरीदारी में ग्राहकों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है।

भ्रष्ट ज्वेलर्स का सिंडिकेट और मुनाफे का गंदा लालच
सराफा बाजार में भरोसे का कत्ल करने वाला यह खेल कुछ नैतिक रूप से भ्रष्ट ज्वेलर्स और कारोबारियों की मिलीभगत से चल रहा है। इंदौर के सराफा बाजार में जब इस फर्जीवाड़े की भनक लगी, तो हड़कंप मच गया और सोना-चांदी व्यापारी एसोसिएशन को आनन-फानन में बैठक बुलाकर सख्त एक्शन लेने का वादा करना पड़ा। लेकिन सवाल सिर्फ इंदौर का नहीं है; आशंका है कि यह जहर देश के कई शहरों की दुकानों तक फैल चुका है। महज 10 फीसदी अतिरिक्त मुनाफे के लालच में ये मुनाफाखोर ग्राहकों के विश्वास और उनकी मेहनत की कमाई के साथ सीधा खिलवाड़ कर रहे हैं।
क्या है 'डुप्लीकेट गोल्ड पाउडर' और कैसे बढ़ता है गहनों का वजन?
इस पूरे गोरखधंधे की जड़ में है एक रहस्यमयी 'डुप्लीकेट गोल्ड पाउडर'। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पाउडर को रुथेनियम (Ruthenium), इरिडियम (Iridium) और ऑस्मियम (Osmium) जैसी बेहद भारी धातुओं को मिलाकर तैयार किया जाता है। विज्ञान का नियम है कि इन धातुओं का घनत्व (Density) सोने की तुलना में कहीं अधिक होता है। जब आभूषण बनाते समय सोने में इस पाउडर की थोड़ी सी भी मात्रा मिलाई जाती है, तो गहनों का वजन तेजी से बढ़ जाता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि मिलावट के बाद भी सोने की चमक और रंगत में रत्ती भर का फर्क नहीं आता और वह हूबहू असली सोने जैसा ही नजर आता है।

चीन से जुड़ा तार: बंगाल और महाराष्ट्र के रास्ते बाजारों में घुसपैठ
जांच और बाजार के सूत्रों से मिली जानकारी इस घोटाले के अंतरराष्ट्रीय तारों की ओर इशारा करती है। प्रबल आशंका है कि इस नकली गोल्ड पाउडर को चीन में तैयार किया जा रहा है। वहां से तस्करी और अवैध चैनलों के जरिए यह मिलावटी सोना पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के रास्ते होता हुआ इंदौर और दिल्ली समेत देश के तमाम बड़े सराफा बाजारों में खपाया जा रहा है। असली सोने की कीमत के मुकाबले इस मिलावटी गोल्ड की लागत करीब 10 प्रतिशत कम बैठती है, और यही 10 फीसदी का अंतर भ्रष्ट कारोबारियों की तिजोरी भरने का जरिया बन रहा है।
पारंपरिक जांच और एसिड टेस्ट क्यों हो जाते हैं फेल?
आम ग्राहक या छोटे सुनार सोने की शुद्धता जांचने के लिए सदियों से कसौटी और 'एसिड टेस्ट' (तेजाब की जांच) पर भरोसा करते आए हैं। लेकिन इस चीनी सिंडिकेट ने विज्ञान का ऐसा दुरुपयोग किया है कि सामान्य एसिड टेस्ट और पारंपरिक व्यावहारिक विधियां इस मिलावट को पकड़ने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं। गहने की ऊपरी परत और धातुओं के मिश्रण का तरीका ऐसा होता है कि तेजाब भी इसे शुद्ध सोना ही बताता है, जिससे ग्राहक बेफिक्र होकर ठगी का शिकार हो जाता है।
जब गहने गलाए जाते हैं, तब सामने आता है खौफनाक सच
इस शातिर ठगी का पर्दाफाश तब होता है, जब कोई इंसान अपनी किसी जरूरत या मजबूरी में उस सोने को बेचने या बदलने के लिए ज्वेलर के पास जाता है। इस मिलावट को पकड़ने के केवल दो ही रास्ते हैं—पहला, जब इसकी जांच एक्स-रे फ्लोरेसेंस (XRF) या इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी जैसी अत्याधुनिक कंप्यूटराइज्ड टेस्टिंग मशीनों पर की जाए। और दूसरा, जब ज्वेलर उस सोने को आग में गलाता है। जैसे ही मिलावटी गहने भट्टी की आग में पिघलते हैं, रुथेनियम और इरिडियम जैसी धातुएं अलग हो जाती हैं और सोने की वास्तविक मात्रा अचानक घट जाती है। उस वक्त ग्राहक के पैरों तले जमीन खिसक जाती है, क्योंकि उसे पता चलता है कि जिस सोने को वह खरा समझ रहा था, उसमें उसे हजारों-लाखों रुपये का चूना लग चुका है।
ग्राहक अब आगे क्या सावधानी बरतें?
अगर आपने हाल ही में धनतेरस पर सोना खरीदा है या आगे शादियों के सीजन में खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो केवल दुकानदार के भरोसे या सामान्य एसिड टेस्ट पर निर्भर न रहें। अपने आभूषणों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए किसी अधिकृत जांच केंद्र पर जाकर 'कंप्यूटराइज्ड टेस्टिंग मशीन' (XRF मशीन) से सोने की जांच जरूर करवाएं, ताकि समय रहते किसी भी बड़ी धोखाधड़ी से बचा जा सके।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट मीडिया स्रोतों और सराफा बाजार से सामने आई जानकारियों व विशेषज्ञों के बयानों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी विशेष समुदाय या सभी ज्वेलर्स की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं को बाजार में चल रही संभावित धोखाधड़ी के प्रति जागरूक और सतर्क करना है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे सोने के आभूषण खरीदते समय केवल विश्वसनीय और बीआईएस (BIS) हॉलमार्क प्रमाणित दुकानों का ही चयन करें, पक्का बिल अवश्य लें और संदेह होने पर कंप्यूटराइज्ड टेस्टिंग मशीन से सोने की शुद्धता की जांच जरूर करवाएं।