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हिमाचल

हिमकेयर योजना में 'व्यवस्था परिवर्तन': फर्जी बिलों के खेल को रोकने के लिए सरकार का बड़ा फैसला - अनिवार्य किया ये दस्तावेज, पढ़ें पूरी खबर..

January 06, 2026 09:24 AM
फ़ोटो : himdarshan.com
Om Prakash Thakur

हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। प्रदेश की महत्वाकांक्षी 'हिमकेयर' (HIMCARE) योजना के तहत मिलने वाले 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज के लिए अब आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication) अनिवार्य कर दिया गया है। स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी द्वारा जारी अधिसूचना के बाद अब बिना डिजिटल सत्यापन के योजना का लाभ लेना संभव नहीं होगा। सरकार का उद्देश्य सिस्टम में सेंध लगाकर अनुचित लाभ उठाने वाले तत्वों पर लगाम कसना और वास्तविक जरूरतमंदों तक शत-प्रतिशत लाभ पहुँचाना है।


शिमला: (HD News);  हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक और बड़ा 'व्यवस्था परिवर्तन' किया है। प्रदेश की महत्वाकांक्षी हिमकेयर (HIMCARE) योजना का लाभ लेने के लिए अब आधार ऑथेंटिकेशन (Aadhaar Authentication) को अनिवार्य कर दिया गया है। स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। सरकार का स्पष्ट तर्क है कि इस कदम से न केवल सिस्टम में पारदर्शिता आएगी, बल्कि फर्जी लाभार्थियों के जरिए होने वाले दुरुपयोग पर भी पूर्ण विराम लगेगा।

सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़ा कदम  -

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पिछले विधानसभा सत्र के दौरान ही संकेत दिए थे कि हिमकेयर योजना के मूल स्वरूप के साथ कुछ निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों द्वारा खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि गरीबों के इलाज की आड़ में सिस्टम का गलत इस्तेमाल हुआ है। अब आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य होने से एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार अनुचित लाभ लेने या फर्जी नामों से बिल क्लेम करने जैसी अनियमितताएं बंद होंगी।

5 लाख तक का मुफ्त इलाज, पर पहले होगी पहचान की पुष्टि - 

नई व्यवस्था के तहत, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को मिलने वाले 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा तभी शुरू होगी, जब लाभार्थी का आधार ऑथेंटिकेशन सफल होगा। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन नागरिकों के पास फिलहाल आधार कार्ड नहीं है, उन्हें योजना से बाहर नहीं किया जाएगा। ऐसे लोगों को आधार नामांकन केंद्र पर जाकर आवेदन करना होगा, जिसकी पूरी जानकारी और केंद्रों की सूची UIDAI की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

ऑथेंटिकेशन फेल होने पर भी मिलेगा विकल्प - 

तकनीकी बाधाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वैकल्पिक रास्ते भी खुले रखे हैं। यदि किसी मरीज के फिंगरप्रिंट घिस जाने या किसी अन्य कारण से बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फेल हो जाता है, तो निम्नलिखित विकल्प अपनाए जाएंगे:

आइरिस स्कैन (Iris Scan): आंखों की पुतलियों के जरिए पहचान।फेस ऑथेंटिकेशन (Face Authentication): चेहरे की पहचान के जरिए सत्यापन। OTP व्यवस्था: आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर 'वन टाइम पासवर्ड' के जरिए वेरिफिकेशन। QR कोड स्कैन: फिजिकल आधार पत्र पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन कर पहचान सुनिश्चित की जाएगी।

बच्चों के हितों की रक्षा सर्वोपरि -

सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए यह स्पष्ट किया है कि आधार की अनिवार्यता के कारण किसी भी बच्चे को इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा। यदि किसी बच्चे का आधार कार्ड नहीं बना है या प्रमाणीकरण में दिक्कत आ रही है, तब भी उसे हिमकेयर योजना के तहत पूर्ण उपचार प्रदान किया जाएगा। बच्चों के नामांकन के लिए माता-पिता या अभिभावकों की सहमति को आधार माना जाएगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही की नई पहल -

यह नई व्यवस्था हिमाचल प्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी हो गई है। स्वास्थ्य विभाग अब मीडिया और अपनी कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाएगा ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इस बदलाव की सही जानकारी मिल सके। सुक्खू सरकार का यह निर्णय स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।


सुक्खू सरकार का यह निर्णय स्वास्थ्य क्षेत्र में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक साहसिक 'व्यवस्था परिवर्तन' है। लंबे समय से हिमकेयर योजना में निजी अस्पतालों और बिचौलियों द्वारा की जा रही अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं, जिस पर यह नई व्यवस्था अंकुश लगाएगी। हालांकि, बायोमेट्रिक फेल होने की स्थिति में फेस ऑथेंटिकेशन और ओटीपी जैसे विकल्प रखना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति तकनीकी कारणों से इलाज से वंचित न रहे। यह कदम न केवल सरकारी खजाने की बचत करेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के लोकतंत्रीकरण को भी मजबूती प्रदान करेगा।

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