हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में मंत्रियों और दिग्गज नेताओं के बीच चल रही 'बयानबाजी की जंग' अब उनके लिए गले की फांस बन गई है। पार्टी की आंतरिक कलह और सार्वजनिक मंचों से लेकर सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ की जा रही तीखी टिप्पणियों पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार को स्पष्ट फरमान जारी किया है कि संगठन और सरकार की छवि को धूमिल करने वाले किसी भी नेता को बख्शा न जाए। इस बार आदेश इतने सख्त हैं कि अनुशासन तोड़ने वालों की न तो कोई सफाई स्वीकार की जाएगी और न ही कोई दलील सुनी जाएगी।
शिमला: हिमाचल प्रदेश की सियासत में पिछले कुछ दिनों से जारी मंत्रियों और नेताओं की जुबानी जंग ने अब दिल्ली के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। प्रदेश सरकार और संगठन के बीच तालमेल की कमी और सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ की जा रही बयानबाजी से कांग्रेस हाईकमान खासा नाराज है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने इस अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं कि पार्टी की छवि खराब करने वाले नेताओं के खिलाफ तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
अनुशासनहीनता पर 'जीरो टॉलरेंस' का संदेश
कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि संगठन से ऊपर कोई नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार को दिए गए निर्देशों में यह स्पष्ट कहा गया है कि भविष्य में अगर कोई भी नेता पार्टी लाइन से हटकर बयान देता है, तो उस पर सख्त एक्शन लिया जाए। इस बार हाईकमान का रुख इतना कड़ा है कि प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में साफ तौर पर लिख दिया है कि अनुशासन तोड़ने वाले किसी भी नेता की कोई भी सफाई, दलील या स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह सीधा संदेश है कि अब पार्टी के भीतर केवल 'अनुशासन की भाषा' ही चलेगी।

हाईकमान के आदेशों के तुरंत बाद, प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों और बोर्ड-निगमों के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों को आधिकारिक पत्र जारी कर सचेत कर दिया है। पत्र में निर्देश दिया गया है कि सरकार या संगठन का कोई भी कार्यक्रम हो या इंटरनेट मीडिया (Social Media) का मंच, नेता अपनी बयानबाजी में संयम बरतें। पार्टी का मानना है कि सार्वजनिक तौर पर की गई टीका-टिप्पणी से न केवल सरकार की साख गिरती है, बल्कि विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए मुद्दा मिल जाता है।
विवाद की जड़: 'बाहरी बनाम हिमाचल' का मुद्दा
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकमान की यह नाराजगी लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के उस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद चरम पर पहुंची, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार से आए अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। इस बयान ने न केवल प्रशासनिक हलकों में तनाव पैदा किया, बल्कि इसे पार्टी की समावेशी नीति के विरुद्ध भी माना गया। एआईसीसी ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा है, क्योंकि इससे पार्टी की राष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक असर पड़ा है।

कैबिनेट में बढ़ती दरार और गुटबाजी
विक्रमादित्य सिंह के बयान के बाद प्रदेश कैबिनेट के भीतर ही विरोधाभास खुलकर सामने आ गया था। जहाँ कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी, अनिरुद्ध सिंह और राजेश धर्माणी ने विक्रमादित्य के स्टैंड से असहमति जताई और उन पर कटाक्ष किए, वहीं रोहित ठाकुर जैसे मंत्रियों ने उनका बचाव किया। मंत्रियों की इस आपसी खींचतान ने यह संदेश दिया कि कैबिनेट में सब कुछ ठीक नहीं है। हाईकमान ने इसी 'गृहयुद्ध' जैसी स्थिति को थामने के लिए विनय कुमार को 'फ्री हैंड' दिया है।
संगठन की मजबूती के लिए निर्णायक कदम
प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार द्वारा उठाया गया यह कदम हिमाचल कांग्रेस की मजबूती के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। एआईसीसी के निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया है कि कुछ नेताओं की व्यक्तिगत महात्वाकांक्षा और बयानबाजी ने आधिकारिक नीति का उल्लंघन किया है। अब देखना यह होगा कि शिमला से लेकर दिल्ली तक मचे इस सियासी बवाल के बाद, क्या हिमाचल के दिग्गज नेता अपनी बयानबाजी पर विराम लगाते हैं या फिर आने वाले दिनों में संगठन के भीतर किसी बड़ी 'सर्जरी' की नौबत आती है।
