हिमाचल प्रदेश सरकार ने अतिनिर्धन परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में 20 वर्षों से आईआरडीपी में शामिल रहने के बावजूद पक्के मकान से वंचित 27, 715 पात्र परिवारों को सरकार आवास सुविधा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल मकान निर्माण नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है।
शिमला: (HD News);.हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के अतिनिर्धन और पात्र गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश में ऐसे 27, 715 अतिनिर्धन परिवारों को पक्का आवास दिया जाएगा, जो पिछले 20 वर्षों से आईआरडीपी (एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम) में शामिल होने के बावजूद अब तक इस मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र परिवार आईआरडीपी से बाहर नहीं रहेगा।
मुख्यमंत्री आज यहां पंचायती राज विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि सुरक्षित आवास केवल एक बुनियादी जरूरत नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामाजिक अधिकार है और प्रदेश सरकार इसे सुनिश्चित करने के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अतिनिर्धन परिवारों के चयन के लिए किए गए सर्वेक्षण के प्रथम चरण में 27, 715 परिवारों की पहचान की गई है। ये वे परिवार हैं जिनकी वार्षिक आय 50 हजार रुपये तक थी और जिनके पास पक्का मकान नहीं था। हालांकि, लंबे समय से आईआरडीपी में शामिल होने के बावजूद इन्हें अब तक पक्के मकान का लाभ नहीं मिल पाया।
उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के द्वितीय चरण में चयन के दायरे का विस्तार किया गया है। इस चरण में उन परिवारों को भी शामिल किया गया है जिनके पास पहले से पक्का मकान है, लेकिन वे अन्य सामाजिक-आर्थिक मानकों के अनुसार अतिनिर्धन श्रेणी में आते हैं। इस प्रक्रिया के बाद 35, 355 अतिरिक्त परिवारों को अतिनिर्धन श्रेणी में जोड़ा गया है, जिससे इन परिवारों की कुल संख्या बढ़कर 63, 070 हो गई है।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सर्वेक्षण का तीसरा चरण भी शीघ्र शुरू किया जाएगा, जिसमें अनाथों, दिव्यांगों और विधवाओं को विशेष प्राथमिकता के साथ अतिनिर्धन श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा चौथे और पांचवें चरण में भी सर्वे किया जाएगा ताकि कोई भी पात्र परिवार सूची से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया के हर चरण में मापदंडों का उदारीकरण करते हुए पात्रता में आवश्यक छूट दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार आईआरडीपी से बाहर न रहे। सरकार का यह प्रयास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाना है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने पंचायती राज विभाग को सुदृढ़ करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाग में रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा और पंचायत स्तर पर कनिष्ठ अभियंताओं (जेई) के पद भी शीघ्र भरे जाएंगे, ताकि विकास कार्यों की गुणवत्ता और गति सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार सामाजिक अधिकारिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। समाज के वंचित, उपेक्षित और कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की जा रही हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल पक्के मकान बनाना नहीं है, बल्कि गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन स्तर उपलब्ध कराना है। इसके तहत मूलभूत सुविधाओं, स्वच्छता, पेयजल और आजीविका के अवसरों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी संबंधित योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता जनहित है और समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना ही ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की मूल भावना है।
बैठक में पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (नवीनीकरण, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस) गोकुल बुटेल, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव पंचायती राज सी. पालरासु, निदेशक पंचायती राज राघव शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।