सोमवार तड़के करीब 3 बजे, जब पूरा अर्की शहर गहरी नींद के आगोश में था, वार्ड नंबर-06 में कयामत टूट पड़ी। बाजार में उठी एक चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और सब कुछ 'श्मशान' में तब्दील कर दिया। इस भीषण अग्निकांड में न केवल कई दुकानें जलकर राख हुईं, बल्कि वहां पेट पालने के लिए रह रहे गरीब दिहाड़ी मजदूरों की जिंदगियां भी तबाह हो गईं। अर्की बाजार में मची अफरा-तफरी के बीच, दमकल विभाग ने आग पर तो काबू पा लिया है, लेकिन राख के सुलगते ढेरों के नीचे दबी एक अनहोनी ने सबके रोंगटे खड़े कर दिए हैं। तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद एक मासूम बच्चे को तो बचा लिया गया, लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस भयावह त्रासदी में 10 से ज्यादा लोगों के जिंदा जल जाने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। पढ़ें पूरी खबर..
सोलन/अर्की: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले का शांत शहर अर्की सोमवार तड़के एक ऐसी भयावह त्रासदी का गवाह बना, जिसने पूरे शहर की नींद उड़ा दी। वार्ड नंबर-06 स्थित मुख्य बाजार में रात के अंधेरे में हुए भीषण अग्निकांड ने हंसते-खेलते परिवारों और व्यापारियों की दुनिया उजाड़ कर रख दी है। आग इतनी विकराल थी कि देखते ही देखते कई दुकानें और उनके पीछे बने गरीब दिहाड़ीदारों के आशियाने धू-धू कर जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गए।

रात 3 बजे का खौफनाक मंजर
घटना करीबन रात के 3 बजे की बताई जा रही है। जब पूरा शहर गहरी नींद में था, तभी वार्ड-6 से उठी आग की गगनचुंबी लपटों ने आसमान को लाल कर दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, आग की विकरालता इतनी ज्यादा थी कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। शहर में अफरा-तफरी मच गई, लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। दमकल विभाग और प्रशासन के पहुँचने तक आग अपना रौद्र रूप दिखा चुकी थी।
राख के ढेर में जिंदगी की तलाश: 3 घंटे बाद निकला मासूम
इस अग्निकांड का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि यहाँ कई गरीब दिहाड़ीदार मजदूर अपने परिवारों के साथ रहते थे। यह आग सिर्फ दुकानों में नहीं, बल्कि उनकी जिंदगियों में लगी थी। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक दिल दहला देने वाला वाकया सामने आया। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मलबे और आग के बीच से एक मासूम नेपाली मूल के बच्चे को बाहर निकाला गया। बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया है, जहाँ वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।

10 से ज्यादा लोगों के जलने की आशंका, प्रशासन मौन
आग पर भले ही काबू पा लिया गया है, लेकिन तबाही का मंजर अभी भी सुलग रहा है। अपुष्ट सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इस भीषण अग्निकांड में 10 से ज्यादा प्रवासी मजदूरों के अंदर फंसे होने या जल जाने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक तौर पर हताहतों की पुष्टि नहीं की है, क्योंकि मलबा पूरी तरह हटने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
नुकसान का आंकलन अभी असंभव है, लेकिन करोड़ों की संपत्ति के साथ-साथ गरीब मजदूरों का सब कुछ स्वाहा हो चुका है। यह घटना प्रशासन की कार्यप्रणाली और शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

मौके पर पहुंचे विधायक, NDRF को बुलावा
भीषण त्रासदी की सूचना मिलते ही स्थानीय विधायक एवं पूर्व मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी बिना समय गंवाए घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से राहत और बचाव कार्यों की जानकारी ली और खुद स्थिति का जायजा लिया।
विधायक संजय अवस्थी ने बताया कि हालात बेहद नाजुक और गंभीर बने हुए हैं। इसे देखते हुए उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की विशेष टीमों को तुरंत मौके पर बुलाने के निर्देश दिए हैं, ताकि मलबे में दबे संभावित लोगों की तलाश में तेजी लाई जा सके।
सरकार पीड़ितों के साथ: संजय अवस्थी
विधायक ने स्पष्ट किया कि फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है और यह जांच का विषय है, लेकिन प्रशासन की पहली प्राथमिकता लापता लोगों को तलाशना है। संजय अवस्थी ने शोक संतप्त परिवारों और अपना सब कुछ खो चुके लोगों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दुख की इस घड़ी में सरकार पूरी तरह उनके साथ खड़ी है और पीड़ित परिवारों को हर संभव सरकारी मदद मुहैया कराई जाएगी।
नोट: इस खबर में हताहतों की संख्या (10 से ज्यादा लोगों के जलने की आशंका) स्थानीय लोगों और मौके पर मौजूद चश्मदीदों द्वारा जताई गई आशंकाओं पर आधारित है। प्रशासन या पुलिस द्वारा अभी तक मृतकों या घायलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मलबा पूरी तरह हटने और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।