रांची से दिल्ली के बीच का सफर सोमवार की शाम काल के ग्रास में बदल गया। रांची के देवकमल अस्पताल से 63% झुलसे मरीज संजय कुमार को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जा रही एक एयर एम्बुलेंस चतरा जिले के सिमरिया के दुर्गम जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद विमान का संपर्क रडार से टूट गया, जिसके बाद शुरू हुए बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में सात शव बरामद किए गए। इस हादसे ने न केवल एक परिवार की उम्मीदें तोड़ दीं, बल्कि हवाई सुरक्षा मानकों पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पढ़ें विस्तार से..
रांची/चतरा: (HD News); झारखंड के चतरा जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। सोमवार (23 फरवरी 2026) की शाम रांची से दिल्ली जा रही एक निजी एयर एम्बुलेंस सिमरिया के घने जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में विमान में सवार मरीज, डॉक्टर और दो पायलटों समेत सभी सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है।

शाम 7:34 बजे टूटा संपर्क
विमानन अधिकारियों के अनुसार, एयर एम्बुलेंस ने रांची से उड़ान भरी थी, लेकिन शाम 7:34 बजे एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से उसका संपर्क अचानक टूट गया। DGCA के मुताबिक, विमान का आखिरी लोकेशन वाराणसी से 100 नॉटिकल मील साउथ-ईस्ट में दर्ज किया गया था। संपर्क टूटने के तुरंत बाद हाई अलर्ट जारी कर बचाव अभियान शुरू किया गया।
हादसे का शिकार हुए लोगों की सूची
चतरा एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत की पुष्टि की है। मृतकों की सूची इस प्रकार है:
बेहतर इलाज की उम्मीद में दिल्ली जा रहे थे संजय
मृतक मरीज संजय कुमार लातेहार जिले के चंदवा के रहने वाले थे। वे पेट्रोलियम उत्पाद से लगी आग में करीब 63% झुलस गए थे। रांची के देवकमल अस्पताल में प्रारंभिक उपचार के बाद, उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली के हायर सेंटर रेफर किया था। इसी उद्देश्य से उन्हें एयर एम्बुलेंस के जरिए ले जाया जा रहा था।

रेस्क्यू ऑपरेशन में चुनौतियां
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। हालांकि, दुर्घटना स्थल सिमरिया का इलाका घने जंगलों और दुर्गम रास्तों से घिरा होने के कारण बचाव दल को शवों को बरामद करने और मलबे तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
जांच के आदेश: महानिदेशालय नागरिक विमानन (DGCA) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को जांच के आदेश दे दिए हैं। टीम जल्द ही मौके पर पहुंचकर दुर्घटना के तकनीकी कारणों का पता लगाएगी।

यह हादसा न केवल तकनीकी विफलता या खराब मौसम का संकेत है, बल्कि यह उन जोखिमों की भी याद दिलाता है जो आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के साथ जुड़े होते हैं। चतरा के घने जंगलों में मलबे के साथ बिखरी जिंदगियां प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती और शोक का विषय हैं। फिलहाल, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की जांच ही यह स्पष्ट कर पाएगी कि यह हादसा पायलट की गलती थी, खराब दृश्यता या विमान में आई कोई तकनीकी खराबी। तब तक, पूरा झारखंड और शोकाकुल परिवार इन सात असमय मौतों के गम में डूबा है।