राजधानी के चमियाणा स्थित 'अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी' (AIMS) परिसर से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने न केवल शिमला बल्कि पूरे हिमाचल को झकझोर कर रख दिया है। एक अस्पताल, जिसे हम 'जीवन का मंदिर' कहते हैं, वहां एक आवारा कुत्ता इंसान की कटी हुई टांग मुंह में दबाए बेखौफ घूम रहा है। यह दृश्य केवल एक विचलित करने वाली तस्वीर नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता और 'सुपर स्पेशलिटी' के दावों की पोल खोलती एक वीभत्स सच्चाई है। पढ़ें विस्तार से..
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक रूह कपा देने वाली तस्वीर सामने आई है। मंगलवार सुबह शहर के प्रतिष्ठित 'अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी' (AIMS), चमियाणा के परिसर में एक आवारा कुत्ता अपने मुंह में इंसान की कटी हुई टांग लेकर घूमता दिखाई दिया। इस खौफनाक मंजर को देखकर अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके तीमारदारों में दहशत फैल गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मानवता को शर्मसार करती घोर लापरवाही
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो में दिख रहा इंसानी अंग एक सर्जिकल एम्प्यूटेशन (अंग विच्छेदन) का हिस्सा था। किसी हादसे के बाद मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने इस टांग को काट कर अलग किया था। नियमानुसार, ऐसे मानव अंगों को एक निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित तरीके से 'बायोमेडिकल वेस्ट' के रूप में डिस्पोज (ठिकाने लगाना) किया जाना चाहिए। लेकिन, अस्पताल प्रबंधन की भारी चूक के कारण यह अंग खुले में रह गया, जिसे कुत्ता उठाकर परिसर में ले आया।
खुला रह गया था बायोमेडिकल वेस्ट रूम का दरवाजा
शुरुआती जांच और सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, जिस कमरे में कटे हुए अंगों और मेडिकल वेस्ट को रखा गया था, उसका दरवाजा ठीक से बंद नहीं किया गया था। इसी सुरक्षा चूक का फायदा उठाकर आवारा कुत्ता भीतर घुस गया और मानव अंग को मुंह में दबाकर बाहर निकल आया। इस दृश्य ने न केवल लोगों को भयभीत किया, बल्कि अस्पताल में सफाई और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

प्रशासन की कार्रवाई: सुपरवाइजर से जवाब तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में जांच के आदेश दिए हैं। सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। प्रशासन अब उस कर्मचारी की पहचान करने में जुटा है, जिसकी ड्यूटी उस समय बायोमेडिकल वेस्ट रूम की निगरानी और निस्तारण की थी। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जनता में भारी आक्रोश
इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि जिस अस्पताल को सुपर स्पेशलिटी का दर्जा प्राप्त है, वहां इतनी बड़ी लापरवाही होना अक्षम्य है। यह न केवल स्वच्छता के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मृत या कटे हुए अंगों के सम्मानजनक निस्तारण की नैतिक जिम्मेदारी का भी अपमान है। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग से कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

अस्पताल के गलियारों में घूमता वह कुत्ता और उसके मुंह में दबा इंसान का अंग, दरअसल हमारे स्वास्थ्य तंत्र की 'मरी हुई संवेदनाओं' का प्रतीक है। चमियाणा अस्पताल की यह घटना चीख-चीखकर कह रही है कि 'सुपर स्पेशलिटी' का टैग लगाने से व्यवस्थाएं नहीं सुधरतीं, उसके लिए अनुशासन और जवाबदेही की जरूरत होती है। प्रशासन को केवल सुपरवाइजर से जवाब नहीं मांगना चाहिए, बल्कि अपनी उस मानसिकता को बदलना चाहिए जो मानव शरीर और सुरक्षा मानकों को 'कचरा' समझती है। अगर आज सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो कल देवभूमि के किसी और अस्पताल से ऐसी ही 'वीभत्स' तस्वीर सामने आएगी।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): > यह समाचार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और प्रारंभिक मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। हम स्वतंत्र रूप से इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करते हैं। इस खबर का उद्देश्य किसी अस्पताल, डॉक्टर या संस्थान की छवि को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि जनहित में स्वास्थ्य व्यवस्था और बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन (Biomedical Waste Management) से जुड़ी गंभीर खामियों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है। यह मामला वर्तमान में विभागीय जांच के अधीन है और जांच के बाद जो भी आधिकारिक तथ्य सामने आएंगे, हमारी वेबसाइट उन्हें भी पूरी निष्पक्षता के साथ प्रकाशित करेगी।