हिमाचल प्रदेश में 'अफसरशाही की मनमानी' का जिन्न अब बोतल से बाहर आ गया है। जो दर्द पहले डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री और मंत्री विक्रमादित्य सिंह बुलंद आवाज में बयां कर चुके थे, आज वही गुस्सा विधानसभा में ज्वालामुखी बनकर फूटा। हैरानी की बात यह है कि सार्वजनिक मंचों से लगातार उठ रही आवाजों के बावजूद मुख्यमंत्री अब तक इस मुद्दे पर अफसरों के बचाव में ही नजर आए हैं। लेकिन अब सरकार की इस नरमी के बीच विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने कमान संभाल ली है। उन्होंने सदन में दो टूक निर्देश दिए हैं कि लापरवाह अफसरों की सूची सौंपी जाए, ताकि उनके खिलाफ नियमों के तहत ऐसी कार्रवाई की जाए जो नजीर बन सके। पढ़ें पूरी खबर...
शिमला (HD News) | हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में आज 'अफसरशाही की मनमानी' का मुद्दा एक बार फिर गूंजा, लेकिन इस बार तेवर बेहद तीखे थे। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राकेश कालिया का गुस्सा उस वक्त सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब उन्होंने सदन में अधिकारियों द्वारा विधायकों के फोन न उठाने और कॉल बैक न करने के रवैये की पोल खोल दी। उन्होंने भरी सभा में चेतावनी देते हुए कहा, "अगर दिमाग सरका तो लोगों को साथ लेकर ऐसे अधिकारियों के दफ्तर के बाहर धरना दूंगा।"

टेलीफोन अलाउंस बंद करने की मांग, मेज थपथपाकर मिला समर्थन
विधायक राकेश कालिया ने अधिकारियों के इस 'वीआईपी कल्चर' पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार इन अफसरों को जो मोटा 'टेलीफोन अलाउंस' दे रही है, उसे तत्काल बंद कर देना चाहिए। जब ये अधिकारी जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों का फोन ही नहीं उठाते, तो सरकारी खर्चे पर मोबाइल रखने का क्या औचित्य है? कालिया के इस दर्द पर सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष ने भी सुर में सुर मिलाया। पूरे सदन ने मेज थपथपाकर यह संदेश दिया कि अफसरशाही की इस बेरुखी से हर विधायक त्रस्त है।
स्पीकर पठानिया का कड़ा संज्ञान: 'नियमों के तहत नपेंगे अधिकारी'
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने तत्काल हस्तक्षेप किया और इसे 'विधायिका के विशेषाधिकार' से जुड़ा गंभीर विषय बताया। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि विधायक जनता की आवाज हैं और उनकी अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने राकेश कालिया और अन्य सदस्यों को निर्देश दिया कि वे हवा में बात करने के बजाय ऐसे लापरवाह अधिकारियों के नाम लिखित में विधानसभा सचिवालय को दें।

एक्शन मोड में विधानसभा: अब होगी सीधी कार्रवाई
विधानसभा अध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि जिन अधिकारियों के नाम शिकायत में आएंगे, उनके खिलाफ विधानसभा के नियमों के तहत सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह पहला मौका नहीं है जब मंत्रियों और विधायकों ने अधिकारियों की 'कॉल इग्नोर' करने की आदत पर सवाल उठाए हैं, लेकिन स्पीकर के इस कड़े रुख से अब बेलगाम नौकरशाही पर नकेल कसने की उम्मीद जगी है।
हिमाचल में बेलगाम अफसरशाही का यह मुद्दा अब केवल एक विधायक की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरी सरकार की साख का सवाल बन चुका है। गौरतलब है कि इससे पहले उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी सार्वजनिक मंचों से अफसरों के 'नकारात्मक रवैये' पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री का इस मुद्दे पर अब तक 'मूकदर्शक' बने रहना कई सवाल खड़े करता है। बहरहाल, कार्यपालिका (सरकार) भले ही अफसरों पर नकेल कसने में नरम रही हो, लेकिन अब विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां के सख्त तेवरों ने साफ कर दिया है कि सदन की अवमानना अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना यह होगा कि 'ब्लैक लिस्ट' बनने के बाद किन 'लाट साहबों' पर नियमों का चाबुक चलता है।
