हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में आज सरकार के खिलाफ आक्रोश का ऐसा ज्वार फूटा कि ठंड के बावजूद सियासी पारा चढ़ गया। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने आज मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर "वादाखिलाफी" और "विश्वासघात" का गंभीर आरोप लगाया है। प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अगुवाई में हजारों पेंशनरों ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि एक तरफ सरकार अपनी 'मित्र मंडली' और चहेतों की पेंशन में 6 गुना बढ़ोतरी कर रही है, और दूसरी तरफ बुजुर्गों को "खजाना खाली" होने का रटा-रटाया पाठ पढ़ा रही है। समिति ने दो टूक ऐलान कर दिया है कि अगर धर्मशाला में किए गए वादे के मुताबिक आगामी बजट सत्र से पहले वार्ता नहीं हुई, तो इस बार विधानसभा का घेराव होगा और यह आंदोलन सरकार की ईंट से ईंट बजा देगा। - पढ़ें पूरी ख़बर..
शिमला, 17 फरवरी 2026: (HD News); हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के खिलाफ प्रदेश के लाखों पेंशनरों का गुस्सा आज सातवें आसमान पर पहुंच गया। 'हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति' के बैनर तले आज राजधानी के चौड़ा मैदान में सरकार के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया गया। प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अगुवाई में जुटे हजारों पेंशनरों ने सरकार पर वादाखिलाफी, झूठ और कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए। समिति ने दो टूक चेतावनी दी है कि मुख्यमंत्री की "कथनी और करनी" में आए इस अंतर को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सरकार के दोहरे चरित्र पर तीखा हमला: "नेताओं की मौज, पेंशनरों को बोझ"
प्रदर्शन के दौरान संघर्ष समिति ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन की पोल खोलते हुए तीखे सवाल दागे। समिति ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार प्रदेश पर 1.10 लाख करोड़ के कर्ज और केंद्र द्वारा राजस्व अनुदान घाटा (RDG) बंद करने का हवाला देकर पेंशनरों का हक मार रही है, वहीं दूसरी तरफ 'अपनों' को रेवड़ियाँ बांट रही है।
सुरेश ठाकुर ने आंकड़े रखते हुए कहा कि सरकार ने हाल ही में लोक सेवा आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की पेंशन में 6 गुना तक की बढ़ोतरी की है (8, 000 से बढ़ाकर 48, 000 रुपये और 7, 500 से बढ़ाकर 45, 000 रुपये)। विधायकों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के वेतन-भत्तों में 40% की वृद्धि की गई है। सलाहकारों और कैबिनेट रैंक की फौज खड़ी करके खजाने पर करोड़ों का बोझ डाला गया है। लेकिन जब बात पेंशनरों के एरियर और डीए की आती है, तो वित्त सचिव की रिपोर्ट का डर दिखाकर हाथ खड़े कर दिए जाते हैं।

धर्मशाला का 'विश्वासघात' और मुख्यमंत्री की चुप्पी
समिति ने सरकार को याद दिलाया कि 28 नवंबर 2025 को धर्मशाला के जोरावर स्टेडियम में एक विशाल रैली की गई थी। उस वक्त मुख्यमंत्री ने शिष्टमंडल को विधानसभा के अंदर बुलाकर आश्वासन दिया था कि सत्र समाप्त होने के एक सप्ताह के भीतर उन्हें वार्ता के लिए बुलाया जाएगा। लेकिन आज महीनों बीत जाने के बाद भी सरकार ने बातचीत की पहल नहीं की। पेंशनरों का आरोप है कि मुख्यमंत्री बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं और जानबूझकर उनकी अनदेखी कर रहे हैं।
बजट सत्र से पहले आर-पार की लड़ाई का ऐलान
संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि यदि आगामी विधानसभा बजट सत्र शुरू होने से पहले शिष्टमंडल को वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया और मांगें नहीं मानी गईं, तो इस बार आंदोलन उग्र होगा। समिति ने ऐलान किया है कि बजट सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव किया जाएगा और यह प्रदर्शन धर्मशाला की रैली से भी विशाल होगा। पेंशनरों ने साफ कर दिया है कि वे अब सरकार के झांसे में नहीं आएंगे।

पेंशनरों की प्रमुख मांगें और मुद्दे
प्रदर्शन के दौरान समिति ने अपनी लंबित मांगों की एक विस्तृत सूची सरकार के सामने रखी, जिनमें प्रमुख हैं:
- बकाया भुगतान: 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट, कम्यूटेशन और संशोधित पेंशन का एरियर तुरंत जारी किया जाए।
- महंगाई भत्ता (DA): 13% लंबित महंगाई भत्ता और 146 महीने का डीए एरियर जारी हो।
- एचआरटीसी और बोर्ड: हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के पेंशनरों को हर महीने की 1 तारीख को पेंशन मिले और इसका स्थायी समाधान हो। बिजली बोर्ड कर्मचारियों को ओपीएस (OPS) का लाभ मिले।
- चिकित्सा और शिक्षा: चिकित्सा बिलों के भुगतान के लिए तुरंत 15 करोड़ रुपये जारी किए जाएं और स्कूल शिक्षा बोर्ड को 75 करोड़ रुपये की अदायगी हो।
- अन्य मांगें: शहरी निकायों के पेंशनरों को 2016 के वेतन आयोग का लाभ, पुलिस और सेना की तर्ज पर कैंटीन सुविधा, और पुलिस पेंशनरों के बच्चों के लिए नौकरी में कोटा निर्धारित किया जाए।

नेताओं ने भरी हुंकार
आज के इस प्रदर्शन में प्रदेश भर के पेंशनर नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर के अलावा महासचिव इन्दर पॉल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा, एचआरटीसी से ब्रिज लाल ठाकुर, बिजली बोर्ड से देव राज शर्मा और डी.के. धतवालिया, पुलिस एसोसिएशन से चमन भाटिया, और शहरी निकाय प्रधान शिव सिंह सेन सहित जिला कांगड़ा, ऊना, सोलन, सिरमौर, किन्नौर और बिलासपुर के संयोजक व अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
सरकार के पाले में गेंद: अब साख बचाने की चुनौती
शिमला के चौड़ा मैदान से उठी यह आवाज महज़ एक धरना नहीं, बल्कि सुक्खू सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी है। पेंशनरों का यह आक्रोश स्पष्ट करता है कि सरकार और वरिष्ठ नागरिकों के बीच अविश्वास की खाई अब बहुत गहरी हो चुकी है। जिस तरह से पेंशनरों ने अपने खाली हाथ और नेताओं की भरी हुई जेबों (वेतन-पेंशन वृद्धि) की तुलना की है, उसने सरकार के "वित्तीय संकट" के तर्क को जनता की अदालत में कमजोर कर दिया है।
अब गेंद पूरी तरह से मुख्यमंत्री के पाले में है। यह बजट सत्र न केवल सरकार की वित्तीय कुशलता की परीक्षा होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि वह अपने बुजुर्गों के सम्मान और वादों को कितनी गंभीरता से लेती है। यदि समय रहते वार्ता का रास्ता नहीं खोला गया, तो विधानसभा घेराव का यह ऐलान सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बन सकता है।