भारतीय सर्राफा बाजार इन दिनों किसी रोलरकोस्टर की सवारी से कम नहीं है। साल की शुरुआत में ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम का ऐतिहासिक स्तर छूने के बाद, अब सोने की कीमतों में स्पष्ट नरमी देखने को मिल रही है। उधर, चांदी पहले ही बड़ी गिरावट के साथ ₹80, 000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल चुकी है। चांदी की इस चाल ने सोने के निवेशकों के मन में भी डर पैदा कर दिया है और बाजार में यह बड़ा सवाल गूंज रहा है: क्या सोना भी ₹80, 000 के नीचे जाने की तैयारी में है? आइए जानते हैं कि मौजूदा बाजार परिदृश्य पर विशेषज्ञों की क्या राय है।
नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय सर्राफा बाजार में पिछले कुछ समय से सोने की कीमतों ने निवेशकों और आम जनता को हैरत में डाल रखा है। जहाँ साल की शुरुआत में सोने ने ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर को छू लिया था, वहीं अब बाजार में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या कीमतें गिरकर ₹80, 000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक और घरेलू कारणों से कीमतों में सुधार (Correction) तो तय है, लेकिन ₹80, 000 का स्तर फिलहाल एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

आज का ताजा बाजार भाव (17 फरवरी 2026)
आज मंगलवार को बाजार खुलते ही सोने और चांदी की कीमतों में पिछले रिकॉर्ड स्तरों के मुकाबले नरमी देखी गई है। देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव लगभग ₹1, 56, 430 प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है, जबकि गहनों के लिए इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1, 43, 390 के करीब दर्ज की गई है। वहीं, चांदी की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते यह ₹2, 68, 000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है।
कीमतों में गिरावट के पीछे के मुख्य कारण
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पिछले एक साल में सोने ने 100% से अधिक का शानदार रिटर्न दिया है, जिसके कारण अब बड़े संस्थागत निवेशक 'प्रॉफिट बुकिंग' (मुनाफावसूली) कर रहे हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस द्वारा डॉलर में व्यापार की वापसी के संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीतियों ने भी सोने की चमक को थोड़ा फीका किया है। घरेलू स्तर पर, फरवरी 2026 के केंद्रीय बजट के बाद से आयात शुल्क और टैक्स नियमों में आए बदलावों का असर भी कीमतों पर साफ दिख रहा है।

चांदी की चमक और ₹80, 000 का अनुमान
चांदी के मामले में विशेषज्ञों का नजरिया थोड़ा अलग है। चांदी ने अपने हालिया उच्चतम स्तरों से भारी गोता लगाया है, लेकिन सोने का ₹80, 000 के नीचे जाना फिलहाल नामुमकिन सा लग रहा है। PACE 360 जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों का अनुमान है कि सोना यदि बहुत ज्यादा गिरता है, तो वह ₹1.10 लाख से ₹1.20 लाख के स्तर पर जाकर स्थिर हो सकता है। चांदी के लिए औद्योगिक मांग में कमी एक बड़ा कारण बनी हुई है, जिससे इसकी कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक अस्थिरता देखी जा रही है।
निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की अंतिम सलाह
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग सोने या चांदी में नया निवेश करना चाहते हैं, उन्हें एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय 'सिप' (SIP) मोड में या किश्तों में खरीदारी करनी चाहिए। यदि सोने की कीमतें ₹1.30 लाख के स्तर तक आती हैं, तो वह लंबी अवधि के निवेश के लिए सबसे अच्छा अवसर होगा। फिलहाल ₹80, 000 का इंतज़ार करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बाजार में सोने की मांग को पूरी तरह खत्म नहीं होने दे रहे हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न बाजार विशेषज्ञों की राय और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कमोडिटी बाजार (सोना-चांदी) में निवेश जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले, कृपया अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श अवश्य लें और अपने विवेक का इस्तेमाल करें।