दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ प्रदेश के गहराते आर्थिक संकट पर मैराथन मंथन के बाद शिमला लौटते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सियासी पारा गरमा दिया है। सीएम ने 'रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट' (आरडीजी) के आंकड़ों का 'बम' फोड़ते हुए पूर्व की जयराम ठाकुर सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला बोला है। उन्होंने सीधा सवाल दागा कि जब भाजपा सरकार को केंद्र से 54 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम ग्रांट मिली थी, तो वह पैसा कहां बर्बाद किया गया और कर्मचारियों को उनके वित्तीय लाभ क्यों नहीं दिए गए? इसके साथ ही सीएम ने दो टूक कहा कि मौजूदा वित्तीय घाटे के बावजूद न तो किसी की नौकरी जाएगी और न ही ओपीएस से सरकार पीछे हटेगी। पढ़ें पूरी खबर..
शिमला : (HD News); हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू दिल्ली के अपने अहम दौरे से शिमला लौट आए हैं। राज्य के गहराते आर्थिक संकट के बीच हुए इस दौरे में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस हाईकमान के साथ मैराथन बैठकें कीं। शिमला लौटते ही सीएम सुक्खू ने विपक्ष पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने केंद्र से मिलने वाली 'रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट' (आरडीजी) के आंकड़ों को लेकर पूर्व की जयराम ठाकुर सरकार को कटघरे में खड़ा किया और उन पर वित्तीय कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए। इसके साथ ही, उन्होंने प्रदेश के कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि वित्तीय संकट का असर उनकी नौकरियों या ओपीएस पर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

दिल्ली में हाईकमान के साथ आर्थिक रोडमैप पर चर्चा
अपने दिल्ली प्रवास के दौरान, मुख्यमंत्री सुक्खू ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ हिमाचल के हितों से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन मंथन किया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से मुलाकात की। इन बैठकों का मुख्य एजेंडा केंद्र से आरडीजी ग्रांट बंद या कम होने से राज्य की आर्थिकी पर पड़ रहा प्रतिकूल असर था। मुख्यमंत्री ने हाईकमान को प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक सुधारों की जानकारी दी और मौजूदा वित्तीय चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर चर्चा की। सीएम ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से भी मिलने का समय मांगा था, लेकिन संसद सत्र जारी होने के कारण यह मुलाकात संभव नहीं हो सकी।
आरडीजी पर आंकड़ों की जंग: 54 हजार करोड़ बनाम 17 हजार करोड़
शिमला लौटते ही मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पिछली भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरडीजी के आंकड़ों के जरिए भाजपा को घेरते हुए कहा कि जयराम सरकार के कार्यकाल में प्रदेश को केंद्र से करीब 54 हजार करोड़ रुपये की आरडीजी मिली थी, जबकि मौजूदा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अब तक केवल करीब 17 हजार करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। सीएम सुक्खू ने बड़ा सवाल उठाया कि 54 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम ग्रांट मिलने के बावजूद भाजपा सरकार ने अपने समय में कर्मचारियों को वित्तीय लाभ क्यों नहीं दिए?

भाजपा पर वित्तीय कुप्रबंधन और फिजूलखर्ची का आरोप
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और संसाधनों की बर्बादी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने गलत जगहों पर पैसा खर्च किया। सीएम का दावा है कि भाजपा शासनकाल में हिमाचल में हजारों करोड़ रुपये की लागत से ऐसी इमारतें बनाई गईं, जो आज किसी काम नहीं आ रही हैं और बेकार पड़ी हैं। उन्होंने पूर्व सीएम जयराम ठाकुर के उस बयान को भी 'झूठ' करार दिया, जिसमें उन्होंने सर्वदलीय बैठक में न बुलाए जाने की बात कही थी। सुक्खू ने नसीहत दी कि जयराम ठाकुर को आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति छोड़कर केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती से रखना चाहिए।
कर्मचारियों को भरोसा: नहीं छिनेंगी नौकरियां, ओपीएस पर रहेंगे कायम
प्रदेश में चल रहे वित्तीय संकट के बीच कर्मचारियों में फैली आशंकाओं को दूर करते हुए मुख्यमंत्री ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि राज्य में वित्तीय घाटा जरूर है, लेकिन इसके बावजूद सरकार न तो किसी की नौकरी खत्म करेगी और न ही कर्मचारियों के हितों से पीछे हटेगी। पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) पर सरकार पूरी तरह कायम है। सीएम सुक्खू ने दावा किया कि उनकी सरकार 54 हजार करोड़ रुपये की आरडीजी लेने वाली पिछली सरकार से भी ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

कल सर्वदलीय बैठक, 16 फरवरी से विधानसभा सत्र
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के मौजूदा आर्थिक हालात और आरडीजी के मुद्दे पर चर्चा के लिए कल सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें सभी दलों के साथ मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श होगा। इसके अलावा, प्रदेश सरकार ने 16 फरवरी से विधानसभा का सत्र बुलाने का फैसला किया है। फिलहाल तीन बैठकों का शेड्यूल तय किया गया है, जबकि सत्र की बाकी रूपरेखा पर फैसला बाद में लिया जाएगा।