हिंदी ENGLISH E-Paper Download App Contact us Tuesday | February 10, 2026
हिमाचल: 'आम जनता पर आर्थिक बोझ और माननीयों की खुली मौज', वित्त विभाग की रिपोर्ट में सियासी खर्चों पर 'रहस्यमयी चुप्पी' - पढ़ें पूरी खबर .. विस्तार से       10 फरवरी 2026 का राशिफल: मंगलवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी हनुमान जी की कृपा, जानें मेष से मीन तक का हाल       IGMC शिमला: इलाज पर महंगाई का 'इंजेक्शन'! टेस्ट और वार्ड के दाम बढ़ाकर अब 'रोगी परेशान समिति' बनने की राह पर अस्पताल - पढ़ें पूरी खबर       शिमला: विधानसभा याचिका समिति की बैठक में 19 में से 7 याचिकाओं का निपटारा, कुलदीप सिंह पठानियां ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश       शिमला में 'जीरो टॉलरेंस': नए SP गौरव सिंह की दो टूक- नशा तस्करों की खैर नहीं, अवैध कमाई से बनी संपत्ति करेंगे कुर्क - पढ़ें पूरी खबर       ​साप्ताहिक राशिफल 9 से 15 फरवरी 2026: सूर्य के कुंभ राशि में प्रवेश से इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें मेष से मीन तक का पूरा हाल       आज का राशिफल 9 फरवरी 2026: सोमवार को इन 5 राशियों पर मेहरबान रहेंगे भोलेनाथ, जानें मेष से मीन तक का हाल       हिमाचल में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज: आज ऊंचे क्षेत्रों में हिमपात, कल पूरे प्रदेश में बारिश-बर्फबारी और अंधड़ का अलर्ट       आज का राशिफल: 8 फरवरी 2026 | भानु सप्तमी पर सूर्य की कृपा से किन राशियों का चमकेगा भाग्य ? पढें मेष से मीन तक का राशिफ़ल..       बजट सत्र का ऐलान: 16 फरवरी से शुरू होगा बजट सत्र, विशेष सत्र नहीं - अब सीधे बजट सत्र; सीएम सुक्खू बोले- '72 साल पुरानी ग्रांट रोकी, जनता को बताएंगे सच' - पढ़ें पूरी खबर..      

हिमाचल

हिमाचल: 'आम जनता पर आर्थिक बोझ और माननीयों की खुली मौज', वित्त विभाग की रिपोर्ट में सियासी खर्चों पर 'रहस्यमयी चुप्पी' - पढ़ें पूरी खबर .. विस्तार से

February 10, 2026 10:51 AM
सांकेतिक फ़ोटो
Om Prakash Thakur

 "हिमाचल प्रदेश की कंगाली का रोना रोकर आम आदमी की जेब पर डाका और माननीयों के लिए सरकारी खजाना खुला... यह है सुक्खू सरकार का असली 'आर्थिक अनुशासन'। जिस वित्त विभाग ने प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए आम जनता की सब्सिडी छीनने और बेरोजगारों के लिए नई भर्तियां बंद करने का फरमान सुनाया है, उसी विभाग की जुबान मंत्री-विधायकों और सलाहकारों की विलासिता पर लुट रहे करोड़ों रुपयों पर सिल गई है। 'त्याग' का पाठ सिर्फ जनता को पढ़ाया जा रहा है, जबकि सत्ता के गलियारों में वेतन-भत्तों की 24 फीसदी बढ़ोतरी का जश्न मनाया जा रहा है।" पढ़ें विस्तार से..

शिमला (HD News): हिमाचल प्रदेश, जो इस समय गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है, वहां सरकार की नीतियां और वित्त विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक सेहत को सुधारने के नाम पर सुक्खू सरकार आम आदमी की कमर तोड़ने वाले फैसले लेने की तैयारी में है, लेकिन खुद सरकार के मंत्रियों, विधायकों और सलाहकारों की विलासिता पर खामोश है। जिस वित्त विभाग ने आम जनता की सब्सिडी बंद करने, नई भर्तियों पर रोक लगाने और कर्मचारियों-पेंशनरों के वित्तीय लाभ रोकने की सिफारिश की है, उसी विभाग ने अपनी रिपोर्ट में सरकार के 'अपनों' पर लुट रहे करोड़ों रुपयों का जिक्र तक नहीं किया है।

वित्त विभाग की प्रेजेंटेशन और दोहरे मापदंड

हाल ही में प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर प्रधान सचिव (वित्त) द्वारा दी गई सार्वजनिक प्रेजेंटेशन ने सरकार की मंशा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस प्रेजेंटेशन में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आम जनता को तो "कड़े फैसलों" के लिए आगाह किया गया, लेकिन मंत्री-विधायकों और सलाहकारों की फौज पर हो रहे भारी-भरकम खर्च पर एक शब्द भी नहीं कहा गया। केंद्रीय बजट में राज्यों के लिए राजस्व घाटा अनुदान खत्म होने को सरकार 'आर्थिक विपदा' बता रही है, लेकिन इस विपदा के बीच भी सियासी ओहदेदारों के खर्चों में कोई कटौती नहीं की जा रही है। यह चुप्पी साबित करती है कि आर्थिक अनुशासन का पाठ केवल आम आदमी के लिए है।

वेतन-भत्तों में 24 फीसदी की ऐतिहासिक बढ़ोतरी

हैरानी की बात यह है कि जब प्रदेश कर्ज के बोझ तले दब रहा था, ठीक उसी समय पिछले बजट सत्र के आखिरी दिन सत्तापक्ष और विपक्ष ने एक सुर में अपने वेतन-भत्तों में 24 फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर ली। इस फैसले के बाद अब विधायकों को पौने तीन लाख रुपये, मंत्रियों को करीब तीन लाख रुपये और मुख्यमंत्री को लगभग सवा तीन लाख रुपये प्रति माह वेतन-भत्ते मिल रहे हैं। इतना ही नहीं, भविष्य में वेतन बढ़ाने के लिए बार-बार बिल न लाना पड़े, इसके लिए ऐसी व्यवस्था कर दी गई है कि हर पांच साल बाद ये वेतन-भत्ते अपने आप बढ़ते रहेंगे। जनता से कुर्बानी मांगने वाले जनप्रतिनिधि खुद अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं।

निगमों-बोर्डों में रेवड़ियों की तरह बांटे पद

मितव्ययिता (Austerity) की बातें करने वाली सरकार ने अपने चहेतों को 'एडजस्ट' करने के लिए निगमों और बोर्डों में अध्यक्ष-उपाध्यक्षों की फौज खड़ी कर दी है। मौजूदा समय में तीन दर्जन से ज्यादा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नियुक्त हैं, जिनका खर्च सरकारी खजाने पर भारी पड़ रहा है। पूर्व की सरकारों में जहाँ इन पदों पर मानदेय महज 15 से 30 हजार रुपये हुआ करता था, वहीं वर्तमान सरकार ने इसे पांच गुना बढ़ाकर सवा लाख रुपये (1.25 लाख) मासिक कर दिया है। इसके अलावा महंगी गाड़ियां, स्टाफ और अन्य वीआईपी सुविधाएं अलग से दी जा रही हैं। कई ओहदेदारों को तो कैबिनेट रैंक देकर मंत्रियों के समकक्ष सुविधाएं दी जा रही हैं।

सलाहकारों की 'महंगी फौज' पर लाखों का खर्च

आरटीआई और आधिकारिक आंकड़ों से जो जानकारी सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। सरकार अपने सलाहकारों पर हर महीने लाखों रुपये पानी की तरह बहा रही है।

  • मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू को 2.50 लाख रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। इसके अलावा दैनिक भत्ता, यात्रा भत्ता, सरकारी वाहन और चिकित्सा प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं अलग हैं।
  • प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान को भी 2.50 लाख रुपये वेतन के साथ 20 हजार रुपये आवास भत्ता और अन्य सभी सरकारी सुविधाएं मिल रही हैं।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर सलाहकार अनिल कपिल को 2, 31, 130 रुपये मासिक वेतन, चिकित्सा और वाहन भत्ते दिए जा रहे हैं। सवाल यह है कि जब सरकार के पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसा नहीं है, तो इन नियुक्तियों का औचित्य क्या है?

 

विशेषज्ञों और आम जनता में आक्रोश

सरकार के इन दोहरे मापदंडों पर अब आर्थिक विशेषज्ञों के साथ-साथ आम जनता भी सवाल उठाने लगी है। जानकारों का कहना है कि अगर प्रदेश सच में 'आर्थिक आपातकाल' जैसी स्थिति में है, तो सबसे पहले कटौती ऊपर से शुरू होनी चाहिए। "चैरिटी बिगिन्स एट होम" की तर्ज पर मुख्यमंत्री, मंत्रियों और सलाहकारों को अपने खर्च कम करने चाहिए। आम जनता की सब्सिडी और युवाओं के रोजगार पर कैंची चलाने से पहले सरकार को अपने शाही खर्चों का हिसाब देना होगा। वित्त विभाग की रिपोर्ट में इन खर्चों को छिपाना यह दर्शाता है कि सरकार समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल लीपापोती में लगी है।

उपरोक्त समाचार सारांश के आधार पर हिमाचल प्रदेश की वर्तमान वित्तीय स्थिति और उस पर विभिन्न विशेषज्ञों व राजनेताओं के विचारों का विवरण इस प्रकार है :-

 वित्तीय बदहाली के लिए नेता और अफसर दोनों जिम्मेवार:  चौहान

पूर्व आर्थिक सलाहकार प्रदीप चौहान ने प्रदेश की वित्तीय बदहाली के लिए नेताओं और अधिकारियों दोनों को समान रूप से जिम्मेदार ठहराया है। उनका तर्क है कि वित्त विभाग राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) को कम करने के ठोस उपाय करने में विफल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार सलाहकारों और बोर्ड-निगमों के अध्यक्षों व उपाध्यक्षों के भारी-भरकम वेतन में कटौती करने जैसे कड़े कदम उठाने से क्यों कतरा रही है।

प्रजातंत्र में कोई खास नहीं, पहले ही कर दिया था आगाह : श्रीधर

पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तरुण श्रीधर का मानना है कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति 'खास' नहीं होना चाहिए और सरकार को उत्पादक तथा अनुत्पादक खर्चों के बीच स्पष्ट अंतर करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो खर्च राज्य के विकास में योगदान नहीं दे रहे हैं, उन्हें तत्काल घटाया जाना चाहिए। श्रीधर के अनुसार, उन्होंने एक साल पहले ही सरकार को आगामी वित्तीय संकट के प्रति सचेत कर दिया था।

75 से ज्यादा अतिरिक्त, उप और सहायक महाधिवक्ता

राज्य में कानूनी खर्चों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वर्तमान सरकार ने मुकदमों की पैरवी के लिए 75 से अधिक अतिरिक्त, उप और सहायक महाधिवक्ताओं की नियुक्ति की है। इन पदों पर तैनात व्यक्तियों को क्रमशः 1.35 लाख, 90 हजार और 67 हजार रुपये तक का मानदेय दिया जा रहा है। ये नियुक्तियां पूरी तरह से राजनीतिक हैं, जो वर्तमान सरकार के कार्यकाल तक बनी रहेंगी, जिससे सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ रहा है।

जरूरत के हिसाब से की जाती हैं राजनीतिक नियुक्तियां: धर्माणी

सरकार का पक्ष रखते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि ये राजनीतिक नियुक्तियां जरूरत के आधार पर की गई हैं और पिछली सरकारों ने भी ऐसा ही किया था। उन्होंने केंद्र सरकार पर राजस्व घाटा अनुदान बंद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे राज्य के हाथ बंध गए हैं। धर्माणी के मुताबिक, 6000 करोड़ रुपये के वित्तीय अंतर को पाटने के लिए हर वर्ग के सहयोग की आवश्यकता है और सरकार अनावश्यक खर्चों को कम करने का प्रयास कर रही है।

कॉस्ट कटिंग के लिए गरीब की जेब पर कैंची न चलाएं सरकार : जयराम

दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सरकार पर फिजूलखर्ची का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके समय में बोर्ड-निगमों के अध्यक्षों को मात्र 30 हजार रुपये दिए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दिया गया है। उन्होंने बड़ी संख्या में महाधिवक्ताओं और सलाहकारों की नियुक्ति की आलोचना करते हुए सलाह दी कि सरकार को 'कॉस्ट कटिंग' के नाम पर गरीबों की जेब पर कैंची नहीं चलानी चाहिए, बल्कि ऐसे विकल्प खोजने चाहिए जिससे आम जनता प्रभावित न हो।

प्रदेश की आर्थिक बदहाली का हवाला देकर आम जनता पर बोझ डालना और खुद वीआईपी सुविधाओं का आनंद लेना सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि सरकार वास्तव में आर्थिक सुधारों के प्रति गंभीर है, तो उसे जनता को 'त्याग' का उपदेश देने से पहले अपने शाही खर्चों पर 'सख्त फैसले' लेने होंगे। वेतन-भत्तों में मनमानी बढ़ोतरी और सलाहकारों की फौज पर जनता की गाढ़ी कमाई लुटाना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह लोकतंत्र में जन-विश्वास के साथ एक बड़ा धोखा भी है। अब वक्त आ गया है कि सरकार 'मितव्ययिता' (Austerity) की शुरुआत अपने घर से करे, अन्यथा जनता की अदालत में इन दोहरे मापदंडों का जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): "इस रिपोर्ट में प्रस्तुत तथ्य, आंकड़े और जानकारियां विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, आरटीआई (RTI) से प्राप्त सूचनाओं और सार्वजनिक पटल पर उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों पर आधारित हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाना है और इसकी सटीकता सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया गया है। हालांकि, आंकड़ों में किसी भी विसंगति या सरकार द्वारा नियमों में किए गए किसी हालिया बदलाव के लिए HD News/संपादक जिम्मेदार नहीं होंगे। यह रिपोर्ट जनहित में "अमर उजाला" में पब्लिश हुई खबर का एक स्वतंत्र विश्लेषण है, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष या संस्था की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि नीतिगत विरोधाभासों को उजागर करना है।"

 

Have something to say? Post your comment

हिमाचल में और

IGMC शिमला: इलाज पर महंगाई का 'इंजेक्शन'! टेस्ट और वार्ड के दाम बढ़ाकर अब 'रोगी परेशान समिति' बनने की राह पर अस्पताल - पढ़ें पूरी खबर

शिमला: विधानसभा याचिका समिति की बैठक में 19 में से 7 याचिकाओं का निपटारा, कुलदीप सिंह पठानियां ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

शिमला में 'जीरो टॉलरेंस': नए SP गौरव सिंह की दो टूक- नशा तस्करों की खैर नहीं, अवैध कमाई से बनी संपत्ति करेंगे कुर्क - पढ़ें पूरी खबर

हिमाचल में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज: आज ऊंचे क्षेत्रों में हिमपात, कल पूरे प्रदेश में बारिश-बर्फबारी और अंधड़ का अलर्ट

बजट सत्र का ऐलान: 16 फरवरी से शुरू होगा बजट सत्र, विशेष सत्र नहीं - अब सीधे बजट सत्र; सीएम सुक्खू बोले- '72 साल पुरानी ग्रांट रोकी, जनता को बताएंगे सच' - पढ़ें पूरी खबर..

हिमाचल में डिग्री बड़ी तो घट गई सैलरी: डॉक्टर की पढ़ाई के लिए मिल रहा था 1.30 लाख रुपये मासिक स्टाइपेंड, और नौकरी के नाम पर 33 हजार - क्या यही है सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर की क़ीमत?

हिमाचल में पंचायत चुनाव पर 'सुप्रीम' लड़ाई: हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंची सरकार, रोस्टर और आपदा एक्ट को बनाया ढाल - पढें पूरी खबर..

क्वानू बस हादसा: हिमाचल विस अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने जताया गहरा शोक, 4 लोगों की मौत पर जताई संवेदना; लापरवाही रोकने की नसीहत - पढें पूरी खबर

दुःखद हादसा : हिमाचल से पांवटा जा रही HRTC बस उत्तराखंड में दुर्घटनाग्रस्त, 3 की मौत; डिप्टी सीएम ने दिए जांच के आदेश - पढ़ें पूरी खबर..

हिमाचल : बयानवीरों पर हाईकमान का हंटर: हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष को कड़ी कार्रवाई के निर्देश; अब न दलील चलेगी, न सफाई - पढ़ें पूरी खबर