हिमाचल प्रदेश की चौदहवीं विधानसभा के ग्यारहवें सत्र का बिगुल बज चुका है। शनिवार को विधानसभा सचिवालय ने 16 फरवरी से बजट सत्र शुरू करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी, लेकिन इस बार सदन का माहौल सामान्य नहीं रहने वाला है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्यपाल के सुझाव को मानते हुए 'विशेष सत्र' का विचार तो त्याग दिया है, मगर केंद्र सरकार के खिलाफ अपने तेवर और तीखे कर लिए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि 72 सालों से मिल रही 'रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट' (RDG) को बंद किए जाने का मुद्दा इस बार सदन में गूंजेगा और यह सत्र केंद्र बनाम राज्य के अधिकारों की लड़ाई का अखाड़ा बनेगा। पढें विस्तार से..
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चौदहवीं विधानसभा के ग्यारहवें सत्र (बजट सत्र) की औपचारिक घोषणा कर दी गई है। विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को राज्यपाल की संस्तुति के बाद इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। 16 फरवरी, सोमवार को दोपहर 2:00 बजे राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के अभिभाषण के साथ इस महत्वपूर्ण सत्र का आगाज होगा। लेकिन, इस बार का सत्र केवल बजटीय प्रक्रियाओं तक सीमित न रहकर केंद्र और राज्य के बीच आर्थिक अधिकारों की लड़ाई का बड़ा मंच बनने जा रहा है।

राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत, स्पीकर ने दी जानकारी
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्र की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि अधिसूचना जारी हो चुकी है। सत्र की शुरुआत पारंपरिक रूप से राज्यपाल के अभिभाषण के साथ होगी। इसके बाद सदन में दिवंगत महानुभावों को श्रद्धांजलि देने के लिए शोकोद्गार प्रस्तुत किए जाएंगे और फिर विधायी कार्य शुरू होंगे। यह सत्र सुक्खू सरकार के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इसमें सरकार न केवल अपना बजट पेश करेगी, बल्कि अपनी 'आर्थिक स्थिति' पर श्वेत पत्र जैसी स्थिति भी स्पष्ट करने की कोशिश करेगी।
रणनीति में बदलाव: विशेष सत्र टला, अब सीधे बजट पर होगा वार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक फैसला लेते हुए 'विशेष सत्र' बुलाने की योजना को रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल की ओर से दिए गए सुझाव को सरकार ने स्वीकार कर लिया है। अब अलग से कोई विशेष सत्र नहीं होगा, बल्कि बजट सत्र के दौरान ही उन सभी मुद्दों को उठाया जाएगा जो प्रदेश के हितों से जुड़े हैं। यह कदम दर्शाता है कि सरकार राज्यपाल के साथ टकराव टालकर, सदन के पटल पर अपनी बात मजबूती से रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

आरडीजी (RDG) पर आर-पार के मूड में सरकार
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बजट सत्र के एजेंडे को लेकर अपने तेवर तीखे कर लिए हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि इस बार के सत्र में 'रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट' (RDG) का मुद्दा सबसे प्रमुखता से गूंजेगा। सीएम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "हिमाचल की जनता को यह सच पता चलना चाहिए कि केंद्र ने प्रदेश के साथ क्या किया है। जो विशेष ग्रांट हिमाचल को आरडीजी के रूप में मिलती थी और जो पिछले 72 सालों से जारी थी, उसे अब बंद कर दिया गया है।" सरकार का मानना है कि यह आर्थिक कटौती सीधे तौर पर हिमाचल के विकास पर प्रहार है।
भाजपा को नसीहत: सोशल मीडिया छोड़, हक़ की लड़ाई में साथ आएं
मुख्यमंत्री ने विपक्ष को भी आड़े हाथों लिया है। उन्होंने भाजपा विधायकों से अपील और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार करने के बजाय सदन में रचनात्मक भूमिका निभाएं। सीएम ने कहा, "करों (Tax) में हिस्सेदारी बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है जो हर साल होती है, लेकिन जो हमारा विशेष अधिकार था, उसे छीना गया है।" उन्होंने भाजपा विधायकों से मांग की है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र सरकार के समक्ष प्रदेश की बहाली और ग्रांट के लिए आवाज बुलंद करें।

बजट सत्र के हंगामेदार रहने के आसार
कुल मिलाकर, 16 फरवरी से शुरू हो रहा यह बजट सत्र बेहद हंगामेदार रहने की संभावना है। एक तरफ सरकार जहां अपनी आर्थिक तंगी का ठीकरा केंद्र की नीतियों और रोकी गई ग्रांट पर फोड़ने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ेगा। अब देखना यह होगा कि क्या सदन में हिमाचल के हितों पर एक राय बन पाती है या फिर यह सत्र भी शोर-शराबे की भेंट चढ़ जाएगा।