हिमाचल प्रदेश के जंगलों से लेकर शहरों के आलीशान ज्वेलरी शोरूम तक फैले वन्यजीव तस्करी के एक 'नेटवर्क' का पर्दाफाश हुआ है। वन विभाग ने 'ऑपरेशन क्लॉइंग बैक' के तहत एक ऐसी गुप्त कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसने न केवल तस्करों की कमर तोड़ दी बल्कि यह भी उजागर किया कि कैसे गहनों की चमक बढ़ाने के लिए बेजुबान तेंदुओं की बलि दी जा रही है। छापेमारी में भारी मात्रा में बरामद हुए नाखून और दांत इस बात का प्रमाण हैं कि अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी और खतरनाक हैं। पढ़ें पूरी खबर..
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू में वन विभाग ने 'ऑपरेशन क्लॉइंग बैक' के जरिए वन्यजीव तस्करों और अंधविश्वास के काले कारोबार पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। विभाग की विशेष टीम ने मंगलवार को ज्वेलरी दुकानों पर एक साथ छापेमारी कर तेंदुए के 85 नाखून, 5 दांत और दुर्लभ पक्षियों के पंख बरामद किए हैं। इस सनसनीखेज खुलासे ने साफ कर दिया है कि गहनों की चमक के पीछे बेजुबान वन्यजीवों के शिकार का खूनी खेल चल रहा था।

अंधविश्वास और अवैध मुनाफे का 'खूनी' गठजोड़
जांच में सामने आया कि इन प्रतिबंधित अंगों का इस्तेमाल ताबीज, लॉकेट और महंगे आभूषणों में सजावट के लिए किया जा रहा था। अंधविश्वास के चलते बाजार में इन अंगों की भारी डिमांड रहती है, जिसका फायदा उठाकर कुछ दुकानदार अवैध रूप से मोटा मुनाफा कमा रहे थे। वन विभाग ने 12 डिप्टी रेंजरों की टीम बनाकर शहर की 6 प्रमुख ज्वेलरी दुकानों पर दबिश दी, जिससे तस्करों के नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।
कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी
"तेंदुआ एक संरक्षित वन्यजीव है। इसके अंगों को रखना या बेचना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत एक गैर-जमानती और गंभीर अपराध है। हमने सारा सामान जब्त कर लिया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।"
— रवि शंकर शर्मा, डीएफओ रोहड़ू

जारी रहेगा अभियान: विभाग की चेतावनी
वन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई महज एक शुरुआत है। 'ऑपरेशन क्लॉइंग बैक' के तहत आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे अंधविश्वास में आकर वन्यजीवों के अंगों से बने उत्पाद न खरीदें, क्योंकि खरीदना और बेचना दोनों ही समान रूप से अपराध हैं।
वन विभाग की यह सख्त कार्रवाई राज्य में सक्रिय शिकारियों और तस्करों के लिए एक खुली चेतावनी है। 'ऑपरेशन क्लॉइंग बैक' ने यह साबित कर दिया है कि कानून की नजर से अंधविश्वास का यह अवैध व्यापार अब छिप नहीं सकता। विभाग की आगामी रणनीति इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने की है, ताकि हिमाचल के शांत जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जनता को भी यह समझना होगा कि अंधविश्वास के लिए खरीदे गए ये 'अंग' उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा सकते हैं।
