हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर में शनिवार की सुबह एक भीषण सड़क हादसे ने कोहराम मचा दिया। टापरी-जानी संपर्क मार्ग पर एक अनियंत्रित कार के 150 मीटर गहरी खाई में गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों सहित चार लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में मां, बेटा और ननद शामिल हैं, जबकि चालक गंभीर रूप से घायल है। इस हृदयविदारक घटना ने न केवल प्रशासन के सड़क सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है, बल्कि महाशिवरात्रि की तैयारियों में जुटे जानी गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है।
किन्नौर (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर में शनिवार सुबह एक हृदयविदारक सड़क हादसा पेश आया। टापरी से जानी गांव की ओर जा रही एक कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी, जिससे इलाके में मातम पसर गया है। इस दुर्घटना में एक ही परिवार के तीन सदस्यों (मां, बेटे और ननद) सहित कुल चार लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे ने न केवल सड़क सुरक्षा के दावों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शिवरात्रि के त्यौहार की खुशियों को भी गहरे शोक में बदल दिया है।

हादसे का घटनाक्रम और रेस्क्यू ऑपरेशन
पुलिस थाना टापरी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार संख्या HP 26B-8999 में सवार होकर पांच लोग सुबह करीब 8:30 बजे टापरी से जानी गांव की ओर निकले थे। जैसे ही वाहन टापरी से कुछ दूरी पर स्थित टावर के पास पहुँचा, चालक ने अचानक नियंत्रण खो दिया। ढलान और संकरी सड़क होने के कारण कार लगभग 150 मीटर नीचे गहरी खाई में जा गिरी। हादसे की आवाज सुनकर स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचित किया। पुलिस दल और ग्रामीणों ने अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों में खाई में उतरकर मृतकों और घायल को बाहर निकाला।
हताहतों का विवरण और परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस भीषण दुर्घटना ने जानी गांव के एक परिवार को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है। मृतकों की पहचान इस प्रकार है:
- कृष्णा (42): पत्नी नरेश कुमार।
- हिमेश कुमार (19): पुत्र नरेश कुमार।
- सुषमा (47): पत्नी रोशन लाल (नरेश कुमार की बहन)।
- इंद्र लाल (30): पुत्र हरि लाल (चालक का भाई)।
हादसे में कार चालक विद्या कृष्ण (32) गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसका उपचार वर्तमान में टापरी स्थित जेएसडब्ल्यू (JSW) अस्पताल में चल रहा है। नरेश कुमार के लिए यह वज्रपात के समान है, जिन्होंने एक ही पल में अपनी पत्नी, इकलौते बेटे और बहन को खो दिया।

सुरक्षा इंतजामों की कमी पर भड़के ग्रामीण
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि 6 किलोमीटर लंबे इस 'डेथ ट्रैप' (खतरनाक मार्ग) पर क्रैश बैरियर या पैरापिट लगे होते, तो कार खाई में गिरने से बच सकती थी। खड़ी पहाड़ी पर बनी इस सड़क पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिससे आए दिन राहगीरों की जान जोखिम में रहती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए तुरंत सुरक्षा दीवारें बनाई जाएं।
मुख्यमंत्री का शोक और प्रशासनिक सहायता
प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने शोक-संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में उनके साथ है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को घायल व्यक्ति के बेहतर उपचार के निर्देश दिए हैं। वहीं, उपमंडल प्रशासन भावानगर की ओर से एसडीएम नारायण चौहान ने मृतकों के परिजनों को 25-25 हजार रुपये और घायल को 10 हजार रुपये की फौरी राहत राशि प्रदान की है।
गमगीन माहौल में अंतिम विदाई
शनिवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। टापरी के श्मशानघाट में जब मां, बेटे और एक अन्य ग्रामीण की चिताएं एक साथ जलीं, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। समूचा जानी गांव इस समय शोक में डूबा है और शिवरात्रि के उपलक्ष्य में होने वाले सभी उत्सव रद्द कर दिए गए हैं। पुलिस फिलहाल मामले की गहनता से छानबीन कर रही है ताकि दुर्घटना के कारणों (तकनीकी खराबी या मानवीय चूक) का पता लगाया जा सके।

किन्नौर के टापरी में हुआ यह भीषण सड़क हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पहाड़ी सड़कों पर लचर सुरक्षा व्यवस्था का एक और खौफनाक उदाहरण है। एक तरफ जहां प्रशासन ने फौरी राहत राशि जारी कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है, वहीं दूसरी तरफ जलती हुई तीन चिताएं और उजड़ा हुआ परिवार यह चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि सड़क किनारे महज कुछ लोहे के क्रैश बैरियर या पत्थरों की दीवार (पैरापिट) चार अनमोल जिंदगियों को बचा सकती थी।
शिवरात्रि के पर्व से ठीक पहले जानी गांव में पसरा यह मातम, लोक निर्माण विभाग और सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी है। पहाड़ का जीवन पहले ही कठिन है, उसे असुरक्षित सड़कें और भी जानलेवा बना रही हैं। अब यह देखना होगा कि क्या प्रशासन इस हृदयविदारक घटना से कोई सबक लेता है और इस 'खूनी मोड़' को सुरक्षित बनाता है, या फिर यह फाइल भी सरकारी दफ्तरों में धूल फांकने के लिए छोड़ दी जाएगी? फिलहाल, नरेश कुमार का परिवार जिस शून्य में खड़ा है, उसकी भरपाई किसी भी मुआवजे से नहीं हो सकती।