शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय के परमार कक्ष में प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. परमार को हिमाचल प्रदेश का वास्तविक शिल्पकार करार दिया। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष, 8 महीने और 16 दिन तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे डॉ. परमार का हिमाचल के निर्माण और विकास में अतुलनीय और अविस्मरणीय योगदान है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल का निर्माण, 1 नवंबर 1966 को पंजाब के पहाड़ी इलाकों का विलय कर 'विशाल हिमाचल' का गठन और 25 जनवरी 1971 को इसे भारतीय गणराज्य का 18वां राज्य बनाने में डॉ. परमार की ऐतिहासिक भूमिका रही है। उनका योगदान केवल हिमाचल तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वे स्वतंत्रता संग्राम के जाने-माने नायक भी थे। 1949 से 1952 तक उनका संविधान सभा का सदस्य रहना इस बात का स्पष्ट परिचायक है कि उनकी क्षमता और योग्यता राष्ट्रीय स्तर की थी।
कुलदीप पठानिया ने बताया कि डॉ. परमार ने अपना पूरा जीवन हिमाचल के लिए समर्पित कर दिया। जब उन्हें प्रदेश की बागडोर मिली, तब यहां की हालत बेहद चिंताजनक थी, शिक्षा का स्तर निम्न था और सड़कें नाममात्र की थीं। वे भली-भांति समझते थे कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें ही जीवन रेखाएं हैं और बिना सड़कों के न तो ग्रामीण विकास संभव है और न ही प्रदेश के ढांचागत स्वरूप को मजबूत किया जा सकता है। इसलिए, जब भी उन्हें दिल्ली जाकर हिमाचल की पैरवी करने का अवसर मिला, उन्होंने सिर्फ और सिर्फ सड़कों के निर्माण की बात रखी। 1952 से 1956 तक प्रथम मुख्यमंत्री रहने के बाद, 1 जुलाई 1963 को क्षेत्रीय परिषद के विधानसभा में परिवर्तित होने पर वे पुनः मुख्यमंत्री बने और इस प्रकार कुल चार बार उन्होंने प्रदेश की कमान संभाली।

उनके मुख्यमंत्रित्व काल की विधायी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए पठानिया ने बताया कि डॉ. परमार के समय सदन में 285 बिल पुरःस्थापित और पारित किए गए। इनमें वर्ष 1963 में मंत्रियों के वेतन व भत्तों से संबंधित पहला बिल और 1964 में हिमाचल प्रदेश भू-अधिग्रहण संशोधन बिल (जो उनके कार्यकाल का 7वां बिल था) प्रमुख रूप से पारित किए गए। इसके अलावा, वर्ष 1976 में हिमाचल प्रदेश दहेज निषेध संशोधन और सामान्य बिक्री कर संशोधन बिल भी उनके ही कार्यकाल में सदन में लाए गए थे।
इस जयंती समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर और विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का विधिवत विमोचन किया। इन पुस्तकों में 'अध्यक्षपीठ से प्रेक्षण एवं विनिर्णय (वर्ष 2011 से 2025 तक)', 'सदन में शेरो-शायरी' और 'सभा में असंसदीय अभिव्यक्तियां' शामिल हैं। कार्यक्रम के उपरांत विधानसभा परिसर की सुंदरता को और अधिक बढ़ाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष ने संयुक्त रूप से पौधरोपण भी किया।

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री के विधानसभा सचिवालय पहुंचने पर विधानसभा अध्यक्ष ने गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया और परमार कक्ष में स्थापित डॉ. परमार के चित्रों का अवलोकन भी किया। इस कार्यक्रम को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी श्रीनिवास जोशी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राधारमण शास्त्री, गंगू राम मुसाफिर, कई विधायकगण, शिमला के महापौर व उप-महापौर, जिलाधीश व एसपी शिमला, विभिन्न बोर्डों एवं निगमों के चेयरमैन तथा राज्य सरकार व विधानसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
