हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल (KNH) से गायनी वार्ड को आईजीएमसी (IGMC) शिफ्ट करने के सरकारी फरमान के खिलाफ भारी जनाक्रोश भड़क उठा है। 'जनवादी महिला समिति' (AIDWA) के बैनर तले 'गदर फ्रंट' ने राज्य सचिवालय का घेराव करते हुए उग्र प्रदर्शन किया, जिस दौरान उनकी पुलिस के साथ तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और रोबोटिक सर्जरी के नाम पर गर्भवती महिलाओं को पर्ची व टेस्ट के लिए दर-दर भटकाने का गंभीर आरोप लगाते हुए, प्रदर्शनकारियों ने सुक्खू सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि अगर बिना देरी किए गायनी ओपीडी वापस KNH में बहाल नहीं की गई, तो यह आंदोलन शिमला की सड़कों से निकलकर पूरे प्रदेश में एक बड़े सियासी तूफान का रूप ले लेगा। पढ़ें विस्तार से..
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल (KNH) से गायनी (स्त्री रोग) ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिफ्ट करने के सरकारी फैसले के खिलाफ जनाक्रोश अब चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार को 'जनवादी महिला समिति' (AIDWA) के बैनर तले 'गदर फ्रंट' ने राज्य सचिवालय की ओर एक विशाल और उग्र मार्च निकाला।
अपने स्वास्थ्य अधिकारों की बहाली की मांग को लेकर सड़क पर उतरीं इन महिलाओं की सचिवालय के बाहर पुलिस के साथ तीखी भिड़ंत भी हुई। बैरिकेड्स लांघने और सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने पर आमादा प्रदर्शनकारियों के तेवर स्पष्ट बता रहे थे कि वे व्यवस्था की इस मनमानी के आगे अब झुकने वाले नहीं हैं।

"महिला अपना हक मांगती, नहीं किसी से भीख मांगती" के गगनभेदी नारों के साथ महिलाओं ने सुक्खू सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर सीधा और तीखा हमला बोला। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं महिला नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार रोबोटिक सर्जरी का बहाना बनाकर प्रदेश के एकमात्र 'मातृ एवं शिशु अस्पताल' (KNH) के ढांचे को तहस-नहस करने की साजिश रच रही है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए कड़े शब्दों में कहा कि स्त्री रोग (Gynecology) और प्रसूति विभाग (Maternity) एक-दूसरे के पूरक हैं और इन्हें किसी भी हाल में अलग नहीं किया जा सकता।

आंदोलनकारियों ने सरकार के इस अव्यावहारिक फैसले को महिलाओं के लिए एक 'जानलेवा त्रासदी' करार दिया है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने भरे मन और गुस्से के साथ बताया कि अस्पतालों के इस अमानवीय बंटवारे के कारण हाल ही में एक गर्भवती महिला और एक बच्चे की जान जा चुकी है, क्योंकि आपात स्थिति में डॉक्टर्स समय पर कॉल पर उपलब्ध नहीं हो सके। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ रहा है। उन्हें गायनी की पर्ची बनवाने के लिए पहले IGMC भेजा जाता है और फिर टेस्ट करवाने के लिए वापस KNH के चक्कर काटने पड़ते हैं। पीड़ा से कराहती गर्भवती महिलाओं को इस तरह दर-दर भटकाना स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

सचिवालय का यह उग्र घेराव और पुलिस के साथ हुई धक्का-मुक्की सत्ताधीशों के लिए एक खुली चेतावनी है। महिला संगठनों ने सरकार को दो-टूक अल्टीमेटम दिया है कि KNH में गायनी ओपीडी को बिना किसी देरी के वापस लाया जाए और अस्पताल में डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की उचित व्यवस्था की जाए। अगर सरकार ने जल्द ही इस अव्यवस्था को दूर कर महिलाओं की इन जायज मांगों को पूरा नहीं किया, तो यह आंदोलन शिमला की सड़कों से निकलकर पूरे प्रदेश में एक बड़े सियासी तूफान का रूप ले लेगा। अब देखना यह है कि सुक्खू सरकार इस भड़कते जन आक्रोश को कैसे शांत करती है।