भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने देश के अदालती परिसरों में महिला वकीलों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने पर जोर देते हुए सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि महिला वकीलों के लिए विशेष बार रूम के निर्माण और रखरखाव हेतु आवश्यक फंड तुरंत जारी किया जाना चाहिए। यह ऐतिहासिक फैसला न्यायालय परिसरों में महिला वकीलों की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

इसी दौरान न्यायपालिका और सरकारी सेवाओं से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी बड़ी प्रशासनिक प्रगति देखने को मिली है। देश के 14 राज्यों ने अपने कर्मचारियों की रिटायरमेंट (सेवानिवृत्ति) उम्र को बढ़ाकर 62 वर्ष करने पर अपनी आधिकारिक सहमति जता दी है। इस बड़े फैसले से लाखों सरकारी और न्यायिक कर्मचारियों को उनके करियर के अंतिम पड़ाव में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

इसके अलावा, सर्वोच्च अदालत ने आरक्षण नियमों से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू को भी स्पष्ट किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई भी उम्मीदवार अपनी योग्यता के आधार पर सामान्य श्रेणी के कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे आरक्षित कोटे के बजाय सामान्य श्रेणी की सीट पर ही समायोजित किया जाना चाहिए। इन अहम फैसलों ने देश के कानूनी और प्रशासनिक ढांचे में दूरगामी प्रभाव छोड़ने की रूपरेखा तैयार कर दी है।