नई दिल्ली: देश में शराब खरीदने के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र की पुष्टि को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। नाबालिगों तक शराब की पहुंच रोकने के उद्देश्य से गैर-लाभकारी संगठन CADD (Community Against Drunken Driving) ने अदालत से शराब की दुकानों, बार, पब और रेस्तरां में उम्र सत्यापन की अनिवार्य व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

14 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से किसी वकील के उपस्थित नहीं होने पर सवाल उठाया। इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। मामले को छह सप्ताह बाद फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।
नाबालिगों को शराब मिलने से रोकने की मांग
याचिका में कहा गया है कि भारत में शराब खरीदने की न्यूनतम कानूनी उम्र अलग-अलग राज्यों में अलग है। इसके बावजूद शराब की बिक्री के दौरान उम्र की प्रभावी जांच नहीं होने से नाबालिगों तक शराब पहुंचने का खतरा बना रहता है। याचिकाकर्ता ने शराब की बिक्री से पहले ग्राहकों की उम्र सत्यापित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

25 साल से कम उम्र के दिखने वालों के ID कार्ड की मांग
वर्ष 2024 में दायर याचिका में सुझाव दिया गया था कि जो ग्राहक देखने में 25 वर्ष से कम उम्र के लगते हैं, उनसे पहचान पत्र मांगा जाए, ताकि उनकी वास्तविक उम्र की पुष्टि की जा सके। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि उम्र सत्यापन की प्रभावी व्यवस्था से नाबालिगों को शराब की बिक्री रोकने और शराब पीकर वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
अभी अनिवार्य ID नियम पर अंतिम आदेश नहीं
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल देशभर में शराब खरीदने से पहले पहचान पत्र दिखाने की अनिवार्यता लागू करने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष और अदालत की टिप्पणियां महत्वपूर्ण होंगी।
