शिमला/केपटाउन: दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में 13 से 18 सितम्बर, 2026 तक आयोजित 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन का आज भव्यता के साथ समापन हो गया। इस छह दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 56 राष्ट्रमंडल देशों के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। समापन अवसर पर “राष्ट्रमंडल के लिए नेतृत्व के नए अवसर: लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के लिए संसदीय कार्रवाई” विषय पर पठानियां ने अपना प्रभावी संबोधन दिया।

अपने संबोधन में पठानियां ने बताया कि राष्ट्रमंडल स्वतंत्र और संप्रभु देशों का एक स्वैच्छिक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका आधुनिक स्वरूप 1949 के लंदन घोषणापत्र के बाद अस्तित्व में आया। आज इस व्यापक वैश्विक संगठन में अफ्रीका, एशिया, यूरोप, अमेरिका, कैरेबियन और प्रशांत क्षेत्र के देश शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सदस्य देश आकार, जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था में एक-दूसरे से काफी अलग होने के बावजूद साझा मूल्यों और सहयोग की भावना के साथ एक मंच पर एकजुट हैं। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच लोकतंत्र, सुशासन, मानवाधिकार, आर्थिक विकास, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देना है।

सम्मेलन में युवाओं और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल छात्रवृत्ति, कौशल विकास और नेतृत्व कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करता है। साथ ही, खेलों के क्षेत्र में 'राष्ट्रमंडल खेल' देशों के बीच मैत्री और खेल भावना मजबूत करने का बेहतरीन माध्यम हैं। भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए पठानियां ने कहा कि भारत के लिए यह मंच विशेष महत्व रखता है। इसके जरिए भारत विकासशील देशों की प्राथमिकताओं, लोकतांत्रिक मूल्यों, जलवायु परिवर्तन और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर सहयोग करता है। अपनी बड़ी युवा आबादी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण भारत राष्ट्रमंडल के विभिन्न कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए पठानियां ने कहा कि आज राष्ट्रमंडल के सामने जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता, डिजिटल विभाजन, बेरोजगारी और वैश्विक स्वास्थ्य जैसी अनेक गंभीर चुनौतियां हैं। इन समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच ज्ञान, तकनीक और संसाधनों का आदान-प्रदान बेहद आवश्यक है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने इस शानदार आयोजन और बेहतरीन आतिथ्य सत्कार के लिए दक्षिण अफ्रीकी संसद का हृदय से धन्यवाद किया। पठानियां ने कहा कि वह इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की कई अविस्मरणीय यादें अपने साथ हिमाचल प्रदेश ले जाएंगे और यहां प्राप्त हुए लाभकारी अनुभवों को राज्य के हित में हिमाचल सरकार के साथ साझा करेंगे।