आज रविवार, 8 नवंबर 2026 को पूरे देश में सनातन संस्कृति का सबसे बड़ा उत्सव 'दीपावली' अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) और बड़ी दिवाली का अद्भुत महासंयोग एक ही दिन होने से धार्मिक उत्साह कई गुना बढ़ गया है। देशभर के प्रमुख मठों, ऐतिहासिक मंदिरों और पावन तीर्थस्थलों पर सुबह से ही पूजा-अर्चना, आरती और दीपदान का सिलसिला जारी है। अयोध्या में रामलला के नव्य मंदिर से लेकर काशी, बद्रीनाथ और देश के कोने-कोने से आई धार्मिक खबरें श्रद्धा की एक अनुपम तस्वीर पेश कर रही हैं।

अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के बाद इस बार की दीपावली कुछ बेहद खास और ऐतिहासिक बन गई है। पूरी रामनगरी को दुल्हन की तरह सजाया गया है और राम जन्मभूमि परिसर से लेकर सरयू घाटों तक लाखों दीयों की कतारों ने पूरी अयोध्या को त्रेतायुग की सी आभा से सराबोर कर दिया है। रविवार की सुबह से ही देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का हुजूम रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन के लिए उमड़ पड़ा है।
इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज अयोध्या पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई और वहां विशेष दीपोत्सव का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पहला दीया जलाया और भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी की आरती उतारी। इस अवसर पर मंदिर के पुजारियों द्वारा विशेष स्वस्तिवाचन और मंत्रोच्चार किया गया, जिससे पूरा परिसर गूंज उठा।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में देशवासियों को दीपावली की हार्दिक बधाई दी और कहा कि यह उत्सव सिर्फ अंधकार पर प्रकाश की विजय का नहीं, बल्कि हमारे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने सरहद पर देश की रक्षा कर रहे जवानों के त्याग को याद करते हुए उनके नाम भी एक दीया जलाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की अयोध्या दुनिया के लिए शांति, सद्भाव और भक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है।
शाम होते ही सरयू के तट पर बने राम की पैड़ी और अन्य घाटों पर 'राम नाम' के जयकारों के बीच दीप प्रज्वलन शुरू हुआ। लाखों स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं ने मिलकर घाटों को रोशनी से पाट दिया। लेजर शो और आतिशबाजी ने सरयू के जल में अद्भुत दृश्य उत्पन्न किए, जिसे देखकर हर कोई भावविभोर हो उठा। सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि उत्सव में कोई बाधा न आए।
