आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है और इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि इसे ऋषि पंचमी व्रत के रूप में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार आज चित्रा नक्षत्र प्रातः 08 बजकर 44 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद स्वाति नक्षत्र का आरंभ होगा। इसी तरह आज शुक्ल योग दोपहर 01 बजकर 18 मिनट तक रहने के बाद ब्रह्म योग का आरंभ होगा। चंद्रमा पूरे दिन और रात तुला राशि में संचार करेगा। आइए जानते हैं आज का सूर्योदय–सूर्यास्त का समय, शुभ-अशुभ मुहूर्त और विशेष उपाय..
आज का पंचांग : 28 अगस्त 2025 (गुरुवार)
राष्ट्रीय मिति भाद्रपद 06, शक संवत 1947, विक्रम संवत 2082 के अनुसार आज का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ है। सौर भाद्रपद मास प्रविष्टे 13, रवि उल्लावल 04 और हिजरी संवत 1447 के अनुसार यह दिन कई दृष्टियों से विशेष माना गया है।
सूर्योदय सुबह 5:56 बजे और सूर्यास्त शाम 6:48 बजे होगा।
पंचमी तिथि शाम 5:00 बजे तक रहेगी।
नक्षत्र: चित्रा (08:44 बजे तक) इसके बाद स्वाति।
योग: शुक्ल (01:18 बजे तक) तत्पश्चात ब्रह्म योग।
करण: बालव (05:57 बजे तक) तत्पश्चात कौलव।
चंद्रमा पूरे दिन तुला राशि में रहेगा।
✅ आज के शुभ मुहूर्त
धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और नए कार्यों की शुरुआत के लिए आज कुछ विशेष शुभ समय रहेंगे।
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:28 से 5:12 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:22 तक
निशीथ काल: मध्य रात्रि 12:00 से 12:45 तक
गोधूलि बेला: शाम 6:47 से 7:09 तक
अमृत काल: सुबह 5:57 से 7:33 तक

❌ आज के अशुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार दिनभर में कुछ अशुभ समय भी रहेंगे जिनमें महत्वपूर्ण कार्यों से बचना चाहिए।
राहुकाल: दोपहर 1:30 से 3:00 तक
गुलिक काल: सुबह 9:00 से 10:30 तक
यमगंड: सुबह 6:00 से 7:30 तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 10:14 से 11:05 तक
आज का व्रत और उपाय
आज ऋषि पंचमी व्रत है। इस व्रत का महत्व शास्त्रों में अत्यधिक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और सप्तऋषियों की पूजा करना शुभ फल देता है। आज के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु के सामने पांच बत्ती वाला घी का दीपक जलाना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
भाद्रपद शुक्ल पंचमी का दिन धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना गया है। आज के दिन व्रत, पूजा और शुभ कार्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त का लाभ उठाकर पूजा और दान करना अत्यंत उत्तम रहेगा। वहीं राहुकाल और अशुभ मुहूर्त में किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए। ऋषि पंचमी का यह व्रत साधकों को पुण्य, आरोग्य और समृद्धि प्रदान करता है।