चंडीगढ़ श्री महावीर मन्दिर मुनि सभा (रजि.), साधु आश्रम, सेक्टर 23-डी द्वारा इस वर्ष 57वां वार्षिक मूर्ति स्थापना समारोह बड़े ही श्रद्धा भाव और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। ब्रह्मलीन श्री सतगुरु देव श्री श्री 108 श्री मुनि गौरवा नन्द गिरि जी महाराज की पावन प्रेरणा से आयोजित यह धार्मिक अनुष्ठान 22 फरवरी 2026 से शुरू होकर 28 फरवरी 2026 तक चलेगा। इस समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में विश्व प्रसिद्ध श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें वृन्दावन के विख्यात कथावाचक अपनी वाणी का रस घोलेंगे। पढ़ें विस्तार से..
चंडीगढ़, सेक्टर 23-डी: स्थानीय श्री महावीर मन्दिर मुनि सभा (रजि.) द्वारा इस वर्ष श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ 57वां वार्षिक मूर्ति स्थापना समारोह आयोजित किया जा रहा है। साधु आश्रम, सेक्टर 23-डी में होने वाला यह आयोजन पूज्यपाद ब्रह्मलीन श्री सतगुरु देव श्री श्री 108 श्री मुनि गौरवा नन्द गिरि जी महाराज की पावन प्रेरणा से संपन्न होगा।

इस विशेष अवसर पर 22 फरवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक एक सप्ताह चलने वाले भव्य धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। समारोह के दौरान मुख्य आकर्षण के रूप में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं को भक्ति और ज्ञान के सागर में गोता लगाने का अवसर मिलेगा।
इस पावन श्रीमद् भागवत कथा का वाचन प्रसिद्ध कथा व्यास श्री हरि जी महाराज (वृन्दावन/चंडीगढ़ वाले) द्वारा किया जाएगा। उनके द्वारा की जाने वाली अमृतमयी कथा का रसपान करने के लिए शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।

सभा के पदाधिकारियों ने शहरवासियों से अपील की है कि वे सपरिवार और इष्ट मित्रों सहित इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर संत महात्माओं के दर्शन करें और कथा श्रवण कर पुण्य के भागी बनें। यह आयोजन क्षेत्र की आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष परंपरा के अनुसार आयोजित किया जाता है।
अंततः, श्री महावीर मन्दिर मुनि सभा द्वारा आयोजित यह 57वां वार्षिकोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि चंडीगढ़ के श्रद्धालुओं के लिए अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ने का एक पावन अवसर है। सात दिनों तक चलने वाली श्रीमद् भागवत कथा और मूर्ति स्थापना के इस संगम में भक्तों को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अनूठा अनुभव प्राप्त होगा। आयोजकों का मुख्य ध्येय समाज में शांति और धार्मिक चेतना का प्रसार करना है, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु इस अमृतमयी वर्षा में शामिल होकर अपने जीवन को सफल बना सके।
