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हिमाचल | शिमला

"नशे के खिलाफ हिमाचल की बड़ी पहल, तस्करों को मिलेगी मौत तक की सजा" - पढ़ें पूरी खबर..

November 18, 2025 04:57 PM

नशा मुक्ति की नई परिभाषा लिखते हुए हिमाचल प्रदेश ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया। नशा मुक्त भारत अभियान के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों को नशे के खिलाफ मुहिम के ध्वजवाहक बनने का आह्वान किया। उन्होंने एकजुट होकर नशे के समूल नाश और नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लेने की प्रेरणा दी। पढ़ें पूरी खबर..

शिमला: नशा मुक्त भारत अभियान के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज शिमला में एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने की। इस अवसर पर मंत्री ने युवाओं, महिलाओं और वृद्धजनों से नशे के खिलाफ ध्वजवाहक बनने का आह्वान किया और कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही नशा मुक्त समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को डॉ. शांडिल ने मादक द्रव्यों के सेवन से दूर रहने और नशामुक्त हिमाचल के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना है।

राष्ट्र एवं राज्य स्तर पर सख्त कदम: तस्करों के लिए मौत तक की सजा

डॉ. शांडिल ने बताया कि प्रदेश सरकार ने नशे की रोकथाम के लिए कई कठोर कदम उठाए हैं। हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (निवारण एवं नियंत्रण) विधेयक-2025 के तहत नशा तस्करों के लिए मृत्यु दंड, आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश ड्रग्स एवं नियंत्रण पदार्थ (रोकथाम, नशामुक्ति और पुनर्वास) विधेयक-2025 के तहत अवैध व्यापार में शामिल लोगों के लिए कड़ी सजा के साथ-साथ नशा मुक्ति, पुनर्वास और आजीविका सहायता हेतु एक राज्य कोष बनाने का प्रावधान भी किया गया है।

चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान: एक जनआंदोलन

मंत्री ने यह भी बताया कि हाल ही में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान की शुरुआत शिमला से की है। इस अभियान के माध्यम से पूरे प्रदेश ने नशे को जड़ से उखाड़ फेंकने की शपथ ली।

उन्होंने कहा, "यदि हम सामूहिक रूप से यह संकल्प लें कि अपने समाज में नशे को किसी भी रूप में पनपने नहीं देंगे, तो निश्चित रूप से हम नशामुक्त हिमाचल एवं नशा मुक्त भारत के निर्माण में सफल होंगे।"

देशभर में 23 करोड़ लोग हुए जागरूक

नशा मुक्त भारत अभियान के तहत पिछले पांच वर्षों में देशभर में लगभग 23 करोड़ लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया है। 20, 000 से अधिक मास्टर स्वयंसेवियों द्वारा 7 लाख से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। 16.72 लाख शैक्षणिक संस्थानों ने राष्ट्रीय ऑनलाइन शपथ में भी भाग लिया है।

वृद्धजन और युवा का संवाद, संस्कृति से जुड़ाव की सीख

कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्रों और वृद्धजनों के बीच संवाद का आयोजन भी किया गया। वृद्धजनों ने अपने अनुभवों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला संजौली की छात्रा आईशा ने कविता के माध्यम से बुजुर्गों के अनुभवों से सीखने और नशे से दूरी बनाने का संदेश दिया। वहीं, कोटशेरा कॉलेज के छात्रों ने नशे की समस्या पर एक प्रभावशाली लघु नाटिका प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में निदेशक ईसोमसा सुमित खिमटा, महिला एवं बाल विकास निदेशक डॉ. पंकज ललित, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स रमेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारी, स्वयं सहायता समूह, पंचायत प्रतिनिधि, अध्यापक, छात्र व अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

हिमाचल सरकार की नशा नियंत्रण नीति ने राज्य को एक मिसाल के रूप में स्थापित किया है। यदि इस गति से जनभागीदारी और सरकारी प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में सम्पूर्ण नशामुक्त हिमाचल और नशा मुक्त समाज का स्वप्न साकार हो सकता है।

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