"हिमाचल प्रदेश विधानसभा के ऐतिहासिक भवन में आज देश भर के 28 राज्यों का लघु रूप नजर आया। मौका था 'छात्र संसद' के प्रतिनिधियों और विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के बीच हुए खास संवाद कार्यक्रम का। करीब 100 साल पुराने इस विरासत भवन की ऐतिहासिकता से रूबरू होते हुए इन मेधावी छात्रों ने अध्यक्ष के सामने संसदीय मर्यादा, ई-विधान की चुनौतियों और संवैधानिक कानूनों पर तीखे सवाल रखे, जिनका विधानसभा अध्यक्ष ने बेहद बेबाकी और सिलसिलेवार ढंग से जवाब दिया।" पढ़ें पूरी खबर..
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश विधानसभा का ऐतिहासिक कौंसिल चैम्बर आज उस समय युवा जोश और बौद्धिक चर्चाओं से सराबोर हो उठा, जब देश के 28 राज्यों से आए 'छात्र संसद' के प्रतिनिधियों ने विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से भेंट की। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के इन मेधावी छात्रों ने न केवल सदन की कार्यप्रणाली को समझा, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों और भविष्य की चुनौतियों पर भी गंभीर संवाद किया।

गौरवशाली इतिहास का साक्षी: ₹10 लाख में बना था यह विरासत भवन :
संवाद कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने छात्रों को इस ऐतिहासिक भवन के महत्व से परिचित करवाया। उन्होंने बताया कि जिस 'कौंसिल चैम्बर' में वे बैठे हैं, उसका निर्माण वर्ष 1920 में शुरू हुआ था और 1925 में यह 10 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ था। पठानिया ने गौरव के साथ साझा किया कि यह भवन देश की प्रथम 'राष्ट्रीय असेंबली' का गवाह रहा है, जहाँ विठ्ठलभाई पटेल ने अंग्रेज प्रतिद्वंद्वी को हराकर प्रथम निर्वाचित चेयरमैन बनने का गौरव प्राप्त किया था।
महिला मताधिकार और 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' का केंद्र :
अध्यक्ष ने सदन की ऐतिहासिक उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसी सदन में महिलाओं को मतदान का अधिकार देने और 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने छात्रों को जानकारी दी कि 25 जनवरी 1971 को हिमाचल प्रदेश भारतीय गणराज्य का 18वां राज्य बना था। पठानिया ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि हिमाचल विधानसभा देश की पहली 'पेपरलेस' असेंबली (4 अगस्त 2014) बनी थी, जिसका अनुसरण आज पूरा देश 'नेवा' (NeVA) प्रणाली के माध्यम से कर रहा है।

दल-बदल कानून और राजनीतिक शुचिता पर तीखे सवाल :
बैठक के दौरान छात्रों ने विधानसभा अध्यक्ष से बेहद प्रासंगिक और चुनौतीपूर्ण प्रश्न पूछे। दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए पठानिया ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कैसे एक अध्यक्ष के रूप में वे सदन के भीतर वैचारिक मतभेदों को दरकिनार कर निष्पक्षता से कार्यवाही का संचालन करते हैं।
ई-विधान और नेवा (NeVA) में अंतर पर चर्चा :
डिजिटल क्रांति के दौर में हिमाचल की अग्रणी भूमिका पर चर्चा करते हुए पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ई-विधान प्रणाली में देश के अन्य राज्यों से बहुत आगे निकल चुका था। हालांकि, अब राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल इंडिया अभियान के तहत 'नेवा' (राष्ट्रीय ई-विधान प्रणाली) को अपनाया गया है। उन्होंने छात्रों को विधेयकों के पारित होने की प्रक्रिया और सदन के समय प्रबंधन की बारीकियों से भी अवगत कराया।

प्रशिक्षु अधिकारियों को दिया 'राष्ट्रहित' का मंत्र :
छात्रों से संवाद के पश्चात, विधानसभा अध्यक्ष ने डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (HIPA) के वित्त एवं लेखा प्रशिक्षण ले रहे अधिकारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने भावी अधिकारियों को निष्ठा और ईमानदारी का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।