हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के नाम पर एक ऐसा खेल खेला जा रहा था, जिसने सरकारी व्यवस्था और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ई-केवाईसी (e-KYC) के रूप में सरकार के पास एक ऐसा ब्रह्मास्त्र लगा, जिसने बरसों से चल रहे इस 'भूतिया' फर्जीवाड़े की पोल खोलकर रख दी है। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 37, 335 ऐसे 'मुर्दे' पाए गए जिनके खातों में नियमित रूप से पेंशन का पैसा पहुंच रहा था, जबकि 5, 532 लोग पात्रता की शर्तें पूरी न करने के बावजूद सरकारी खजाने में सेंध लगा रहे थे। यह केवल एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि प्रशासनिक मिलीभगत और फील्ड स्तर पर भारी लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है, जिस पर अब सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी कर ली है। पढ़ें पूरी खबर..
शिमला: हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये के खेल का ई-केवाईसी (e-KYC) के माध्यम से बड़ा पर्दाफाश हुआ है। इस सत्यापन प्रक्रिया में खुलासा हुआ है कि प्रदेश में 37, 335 मृत व्यक्ति और 5, 532 अपात्र लोग वर्षों से सरकारी खजाने में सेंध लगा रहे थे। इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार ने अब दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की तैयारी कर ली है।

सचिव वित्त ने इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्पष्ट किया है कि यह प्रकरण केवल डेटा सुधार या फाइलें बंद करने तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि उन सभी जिम्मेदार अधिकारियों और फील्ड स्तर पर तैनात कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए, जिनकी लापरवाही के कारण यह फर्जीवाड़ा इतने लंबे समय तक चलता रहा। सरकार का मानना है कि यदि फील्ड स्टाफ ने समय-समय पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया होता, तो मृत और अपात्र लोगों के खातों में पेंशन की राशि कभी नहीं पहुंचती।
वित्त विभाग के अनुसार, कल्याणकारी योजनाओं का बजट केवल वास्तविक और जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंचना ही सरकार की प्राथमिकता है। सचिव वित्त ने दोटूक शब्दों में कहा है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी कड़ी में अब ई-केवाईसी (e-KYC) और सीआरएस (Civil Registration System) आधारित सत्यापन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ और सख्त बनाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत मृत व्यक्तियों का डेटा सीधे पेंशन पोर्टल से लिंक किया जाएगा ताकि मृत्यु के साथ ही पेंशन स्वतः ही बंद हो जाए और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों की कोई गुंजाइश न रहे।

प्रशासन अब उन अधिकारियों की सूची तैयार कर रहा है जिन्होंने सत्यापन रिपोर्ट में कोताही बरती। दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ चार्जशीट करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी। इसके साथ ही, अपात्र तरीके से ली गई पेंशन राशि की रिकवरी के विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। सरकार का यह कदम प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण का निष्कर्ष यह है कि यह केवल डेटा में सुधार का मामला नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त करने की एक बड़ी मुहिम है। सचिव वित्त के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि अब फाइलों में 'सब ठीक है' वाली रिपोर्ट देने वाले अधिकारी और कर्मचारी बच नहीं पाएंगे। ई-केवाईसी और सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) का एकीकरण न केवल भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि प्रदेश के जरूरतमंद और पात्र बुजुर्गों का हक कोई और न छीन सके। सरकार की यह सक्रियता यह संदेश देती है कि डिजिटल पारदर्शिता ही जनता के पैसे की सबसे बड़ी संरक्षक है।
