हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित 28वें अंतरराष्ट्रीय स्पीकर और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (CSPOC) में भाग लेकर वैश्विक मंच पर प्रदेश की उपस्थिति दर्ज कराई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'संविधान सदन' के ऐतिहासिक केंद्रीय हॉल में उद्घाटित इस त्रि-दिवसीय सम्मेलन में दुनिया भर के 53 राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय दिग्गजों और पीठासीन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की मेजबानी में आयोजित इस महाकुंभ में अध्यक्ष पठानिया ने न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर दिया, बल्कि आतंकवाद और बेरोजगारी जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए संसदीय कूटनीति को अनिवार्य बताया।
नई दिल्ली/शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित 28वें अंतरराष्ट्रीय 'स्पीकर और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन' (CSPOC) में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। 14 से 16 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में दुनिया भर के 53 राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं, जहाँ विधायी प्रक्रियाओं और वैश्विक चुनौतियों पर मंथन किया जा रहा है।

सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय हॉल में किया। प्रधानमंत्री ने अपने मुख्य संबोधन में वैश्विक लोकतंत्र की मजबूती और संसदीय सहयोग पर बल दिया। इस अंतरराष्ट्रीय समागम की मेजबानी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस मंच पर भारत के केवल 28 राज्यों के पीठासीन अधिकारियों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है, जिनमें हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया प्रमुख रूप से शामिल हैं।
सत्र को संबोधित करते हुए कुलदीप सिंह पठानिया ने संसदीय कूटनीति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अंतर-संसदीय संघ (IPU) राष्ट्रीय संसदों का एक ऐसा वैश्विक संगठन है, जो विश्व स्तर पर शांति, लोकतंत्र और सतत विकास को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के मंच वैश्विक समस्याओं का साझा समाधान खोजने के लिए अनिवार्य हैं।

पठानिया ने अपने वक्तव्य में आतंकवाद, बेरोजगारी और सीमा विवादों जैसे गंभीर मुद्दों को भी छुआ। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी मानव सभ्यता शांति और एकता की अपील कर रही है, तब बेकारी, अलगाववाद और अंतरराष्ट्रीय सीमा विवादों जैसी जटिल समस्याओं पर ऐसी गंभीर चर्चाएं ही शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन के निष्कर्षों से आने वाले समय में दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे।
इस भव्य आयोजन में राज्यसभा के उपसभापति डॉ. हरिवंश, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के अध्यक्ष क्रिस्टोफर कलिला, और अंतर-संसदीय संघ की अध्यक्ष डॉ. तूलिया ऐक्सन ने भी अपने विचार रखे। सम्मेलन के दौरान हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सचिव यशपाल शर्मा भी अध्यक्ष पठानिया के साथ मौजूद रहे। यह सम्मेलन न केवल विधायी अनुभव साझा करने का माध्यम बना, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास भी रहा।

कुलदीप सिंह पठानिया का इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होना न केवल हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह विधायी कूटनीति में राज्य की सक्रिय भागीदारी को भी दर्शाता है। 53 राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष आतंकवाद, बेरोजगारी और सीमा विवादों जैसे वैश्विक मुद्दों पर हिमाचल की ओर से मजबूती से पक्ष रखकर पठानिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय समस्याओं का समाधान वैश्विक सहयोग में निहित है। यह सम्मेलन भविष्य में संसदीय प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सशक्त और जन-उपयोगी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।