"हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर 'सत्ता बनाम अफसरशाही' की जंग छिड़ गई है। कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान से उपजे विवाद के बीच, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने न केवल नौकरशाही को कड़ा संदेश दिया है, बल्कि अपनी सुरक्षा छोड़ने तक की बात कह कर सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। विक्रमादित्य ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि ही सर्वोपरि हैं और किसी भी अधिकारी को 'शासक' बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।" पढ़ें विस्तार से..
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश की सियासत में इन दिनों मंत्रियों और नौकरशाही के बीच छिड़ी जंग ने नया मोड़ ले लिया है। कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह के अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान के बाद उपजे विवाद पर अब लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है। विक्रमादित्य सिंह ने स्पष्ट और बेहद कड़े शब्दों में संदेश दिया है कि वे प्रदेश के हितों और अपने नैतिक मूल्यों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने दो-टूक कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है और किसी भी अधिकारी को 'शासक' बनने की गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए।

"जनप्रतिनिधि सेवक हैं, अधिकारी खुद को शासक न समझें"
अधिकारियों के साथ चल रहे गतिरोध पर विक्रमादित्य सिंह ने संवैधानिक मर्यादाओं की याद दिलाते हुए कहा कि भारत एक संघीय गणराज्य है जहाँ हर पद की अपनी जिम्मेदारी तय है। उन्होंने कहा, "हम इस कुर्सी पर इसलिए बैठे हैं क्योंकि हमें जनता ने चुना है। हमारा एकमात्र उद्देश्य 'सर्विस ऑफ द पीपल' (जनता की सेवा) है।" उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि कोई सार्वजनिक सेवक खुद को शासक समझने की भूल करता है, तो एक जनप्रतिनिधि होने के नाते सवाल उठाना उनकी नैतिक जिम्मेदारी और दायित्व है, जिससे वे कभी पीछे नहीं हटेंगे।
सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख: "वापस ले सकते हैं सिक्योरिटी"
IPS एसोसिएशन के रुख और सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं पर विक्रमादित्य सिंह का जवाब सबसे अधिक चर्चा में है। उन्होंने कहा कि उनके मन में अधिकारियों के लिए पूरा सम्मान है, लेकिन वे सुरक्षा के मोहताज नहीं हैं। मंत्री ने तंज कसते हुए कहा, "हिमाचल के लोग इतने कमजोर नहीं हैं कि उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत पड़े। मेरे लिए प्रदेश की 75 लाख जनता का प्यार और आशीर्वाद ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। सरकार को जो भी सुरक्षा वापस लेनी है, वह ले सकती है।"

"उम्र में छोटा हूं, लेकिन सिद्धांतों पर अडिग"
विवादों को शांत करने की कोशिश के साथ-साथ अपने तेवर दिखाते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वे उम्र में छोटे हैं, इसलिए किसी व्यक्तिगत विवाद में नहीं पड़ना चाहते। लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उनकी शालीनता को उनकी कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने कहा, "सार्वजनिक जीवन में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन मैं अपने संस्कारों और सिद्धांतों से समझौता नहीं करूंगा। इन्हीं मूल्यों से व्यक्ति की पहचान बनती है।"
हिमाचल के हितों के लिए दिल्ली से शिमला तक बुलंद रहेगी आवाज
अपनी जवाबदेही को स्पष्ट करते हुए लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि वे चाहे शिमला में हों या दिल्ली में, हिमाचल प्रदेश के मुद्दों को उठाना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हितों की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता है। अगर कहीं भी उन्हें लगेगा कि हिमाचल के जनहित प्रभावित हो रहे हैं, तो वे पूरी मजबूती के साथ अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
"विक्रमादित्य सिंह का यह रुख स्पष्ट करता है कि वे प्रदेश की राजनीति में अपनी एक स्वतंत्र और जन-हितैषी छवि को और मजबूत करना चाहते हैं। अफसरों को 'शासक' न बनने की नसीहत और अपनी सुरक्षा वापस लेने की चुनौती देकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि वे दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाले नहीं हैं। अब देखना यह होगा कि मंत्री के इस तीखे प्रहार के बाद प्रशासनिक गलियारों और मुख्यमंत्री स्तर पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।"
