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हिमाचल | बिलासपुर

हिमाचल में भ्रष्टाचार का 'शर्मनाक' चेहरा: जमीन की तकसीम के बदले मांगी 'शराब और मांस' की दावत, मंत्री ने दिए जांच के आदेश - पढ़ें पूरी खबर

January 16, 2026 09:20 AM
Om Prakash Thakur

घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र की कोट पंचायत में आयोजित 'सरकार गांव के द्वार' कार्यक्रम में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक गरीब फरियादी ने राजस्व विभाग के तंत्र को सबके सामने बेनकाब कर दिया। पीड़ित ने खुले मंच से तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के सामने यह खुलासा किया कि विभाग के कर्मचारी उसकी पुश्तैनी जमीन के बंटवारे के बदले 'शराब और मीट' की मांग कर रहे हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद मंत्री ने तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। पढ़ें पूरी खबर..

बिलासपुर (घुमारवीं): हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक शर्मनाक उदाहरण घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र की कोट पंचायत में आयोजित 'सरकार गांव के द्वार' कार्यक्रम में देखने को मिला। यहाँ एक गरीब फरियादी ने राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर खुले मंच से गंभीर आरोप लगाए, जिसने न केवल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया, बल्कि कार्यक्रम में मौजूद मंत्री और उच्चाधिकारियों को भी सन्न कर दिया।

खुले मंच से छलका गरीब का दर्द

ब्रह्मली गांव के निवासी सीता राम, जो दिहाड़ी-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, ने भारी मन से अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के समक्ष राजस्व विभाग के कर्मचारियों की काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। सीता राम ने आरोप लगाया कि उनकी पुश्तैनी जमीन के बंटवारे (तकसीम) के बदले विभाग के कुछ कर्मचारी उनसे सीधे तौर पर शराब और मांस की दावत की मांग कर रहे हैं। चूंकि वह एक गरीब मजदूर हैं और इन अनैतिक मांगों को पूरा करने में असमर्थ हैं, इसलिए उनकी फाइल को जानबूझकर फाइलों के ढेर में दबाया जा रहा है।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी बुनियादी सुविधाएं

पीड़ित सीता राम ने बताया कि राजस्व विभाग की इस सुस्ती और भ्रष्टाचार के कारण वह अपने घर में एक शौचालय तक का निर्माण नहीं कर पा रहे हैं। जमीन का विधिवत बंटवारा न होने के कारण कानूनी अड़चनें आ रही हैं, जिससे उनका पूरा परिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। उन्होंने बताया कि वह पिछले लंबे समय से विभाग की चौखट घिस रहे हैं। हालांकि, वर्ष 2024 में नायब तहसीलदार ने मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी, लेकिन भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत के कारण धरातल पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मंत्री ने लगाई अधिकारियों की क्लास, जांच के आदेश

फरियादी की शिकायतों को सुनकर मंत्री राजेश धर्माणी का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही प्रशासनिक अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई और दो-टूक शब्दों में कहा कि एक गरीब व्यक्ति से इस तरह की अनैतिक मांग करना न केवल भ्रष्टाचार है, बल्कि पूरी तरह से अमानवीय है। मंत्री ने इसे सरकार की छवि खराब करने वाला कृत्य करार देते हुए उपायुक्त (DC) को तुरंत एक उच्च स्तरीय जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के आदेश जारी किए।

प्रशासनिक महकमे में हड़कंप

मंत्री के कड़े तेवर देख प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। मौके पर मौजूद उपायुक्त ने तुरंत मामले से संबंधित फाइल तलब कर ली है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस प्रकरण की गहनता से जांच की जाएगी और यह पहचान की जाएगी कि किन कर्मचारियों ने अनैतिक मांग की थी और किनकी लापरवाही से काम रुका हुआ था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी और जनहित के कार्यों में बाधा डालने वाले कर्मचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

यह घटना दर्शाती है कि हिमाचल के ग्रामीण इलाकों में आज भी आम आदमी को अपने छोटे-छोटे कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के लिए किस कदर जद्दोजहद करनी पड़ रही है। एक गरीब मजदूर का शौचालय निर्माण जैसा कार्य भी अगर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाए, तो यह पूरे प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि जांच की रिपोर्ट में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों पर क्या सख्त कार्रवाई होती है और क्या सीता राम जैसे आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय मिल पाता है।

डिस्क्लेमर : यह समाचार 'सरकार गांव के द्वार' कार्यक्रम में फरियादी द्वारा लगाए गए सार्वजनिक आरोपों और उस पर मंत्री द्वारा दी गई प्रतिक्रिया पर आधारित है। himdarshan.com इन आरोपों की व्यक्तिगत पुष्टि नहीं करता है। मामले की सत्यता जिला प्रशासन द्वारा की जाने वाली उच्च स्तरीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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