"नई दिल्ली के संसद भवन में आयोजित 28वां अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रमण्डल स्पीकर एवं पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (CSPOC) शुक्रवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। इस वैश्विक सम्मेलन के समापन पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने आधुनिक दौर में सूचनाओं की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया पर एक प्रभावी 'निगरानी तंत्र' विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। पठानियां ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का हवाला देते हुए कहा कि बदलते समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल माध्यमों का उपयोग जनहित में पारदर्शिता लाने के लिए किया जाना अनिवार्य है।"
नई दिल्ली/शिमला: भारतीय संसद के तत्वावधान में नई दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित 28वें राष्ट्रमण्डल देशों के राष्ट्रीय स्पीकर और पीठासीन अधिकारियों का तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (CSPOC) आज अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। 14 से 16 जनवरी, 2026 तक चले इस गरिमामयी आयोजन का शुभारंभ पिछले कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। इस वैश्विक मंच पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया और विभिन्न तकनीकी सत्रों में अपने विचार साझा किए।

सम्मेलन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें विश्व के 67 राष्ट्रमण्डल देशों के लगभग 61 राष्ट्रीय स्पीकरों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही भारत के 28 राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारियों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। कार्यशाला के दौरान लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला, कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफर कलिला, गुयाना की राष्ट्रीय विधानसभा के अध्यक्ष और कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष फ्राँसिस स्कार्पालोजिया ने भी महत्वपूर्ण संबोधन दिए।
संसद टीवी को दिए एक साक्षात्कार में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने भारतीय लोकतंत्र की अटूट शक्ति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्सों में सरकारें अस्थिर हो रही हैं और शासन तंत्र अपने ही नागरिकों के विरुद्ध खड़ा नजर आ रहा है, ऐसे समय में भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली पिछले 78 वर्षों से निरंतर सशक्त हुई है। उन्होंने कहा कि 146 करोड़ की विशाल जनसंख्या और भाषाई विविधता के बावजूद भारत में 'विविधता में एकता' का जो स्वरूप दिखता है, वही हमारे सशक्त शासन तंत्र और प्रजातांत्रिक मूल्यों का आधार है।

पठानियां ने सम्मेलन में सूचना तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव पर भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि सोशल मीडिया और नए नवाचार आज के युग में प्रजातांत्रिक प्रणाली के मुख्य कारक बन चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा या लोकसभा की चारदीवारी के भीतर होने वाली चर्चाएं और नीतियां आम जनता तक पहुँचनी चाहिए। आम नागरिक को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके लिए क्या कानून बनाए जा रहे हैं और क्या वे वास्तव में जनहित में हैं।
सूचनाओं की सत्यता सुनिश्चित करने के विषय पर बोलते हुए कुलदीप सिंह पठानियां ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों और जनता के बीच सच्चा संवाद बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के माध्यम से सही जानकारी पहुँचना अनिवार्य है। इसके लिए एक प्रभावी निगरानी तंत्र (Monitoring Mechanism) की आवश्यकता है ताकि भ्रामक सूचनाओं पर रोक लग सके और डिजिटल मीडिया का उपयोग सकारात्मक रूप से जनसेवा के लिए किया जा सके।

हिमाचल प्रदेश की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए पठानियां ने कहा कि प्रदेश ई-विधान प्रणाली को लागू करने में देशभर में अग्रणी रहा है। वर्तमान में प्रदेश 'राष्ट्रीय ई-विधान' (NeVA) को पूरी तरह अपना चुका है और सदन की कार्यवाही को तकनीक के माध्यम से जनता तक पहुँचाने में आज भी सबसे आगे है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सचिव यशपाल शर्मा भी उनके साथ मौजूद रहे और विभिन्न विधिक व तकनीकी सत्रों में भाग लिया।