खाकी बनाम खाकी के अभूतपूर्व टकराव ने पूरे देश की कानून-व्यवस्था को हैरान कर दिया है। सोलन जिले के धर्मपुर में जब हिमाचल प्रदेश पुलिस और दिल्ली पुलिस की एलीट 'स्पेशल सेल' आमने-सामने आई, तो एक नाम सबसे ज्यादा गूंजा - ACP राहुल विक्रम। एक तरफ स्थानीय पुलिस का भारी दबाव और एफआईआर (FIR) की चेतावनी थी, तो दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की टीम का अपना कानूनी तर्क। लेकिन इन सबके बीच 2018 बैच के दानिप्स (DANIPS) अधिकारी राहुल विक्रम एक चट्टान की तरह अपनी टीम के साथ डटे रहे। उन्होंने बिना किसी खौफ के अपनी कार्रवाई को कानूनी रूप से सही ठहराया और अंतरराज्यीय पुलिसिया अधिकारों की एक नई बहस को जन्म दे दिया। आखिर कौन हैं राहुल विक्रम और क्यों उन्हें स्पेशल सेल का सबसे मारक हथियार माना जाता है ? पढ़ें विस्तार से ..
शिमला/सोलन: (HD News); हिमाचल में दिल्ली पुलिस और हिमाचल पुलिस के बीच हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। इस अंतरराज्यीय पुलिस टकराव में जिस एक नाम की सबसे ज्यादा गूंज रही, वह है - राहुल विक्रम। दिल्ली पुलिस की एलीट यूनिट 'स्पेशल सेल' के एसीपी राहुल विक्रम न सिर्फ हिमाचल पुलिस के सामने अपनी टीम के साथ डटे रहे, बल्कि पूरी बेबाकी के साथ अपनी कार्रवाई को कानूनी और विधिसम्मत ठहराया।

जानिए क्या था पूरा मामला?
20 फरवरी को दर्ज एक FIR के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम तीन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर हिमाचल से दिल्ली ले जा रही थी। इसी बीच हिमाचल पुलिस ने बिना पूर्व सूचना के कार्रवाई का आरोप लगाते हुए दिल्ली पुलिस का रास्ता रोक लिया। तनाव के बीच, मौके पर मौजूद ACP राहुल विक्रम ने दो टूक कहा कि उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह कानून के दायरे में है और उन्हें अपनी ड्यूटी करने से रोका जा रहा है। नतीजा यह हुआ कि हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर ही क्रॉस FIR दर्ज कर दी। हालांकि बाद में दिल्ली पुलिस की टीम को छोड़ दिया गया और दिन-रात के हावोल्टेज ड्रामें तीनों आरोपियों को दिल्ली पुलिस अपने साथ ले गई।
खाकी से टकराई खाकी: हिमाचल पुलिस के सामने 'स्पेशल सेल' के ACP राहुल विक्रम का हाई-वोल्टेज ड्रामा!
मैदान में सख्त, ऑपरेशन में तेज: यही है राहुल विक्रम की पहचान
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव के रहने वाले 2018 बैच के DANIPS अधिकारी राहुल विक्रम कोई आम पुलिस अफसर नहीं हैं। पिछले कुछ सालों से वह दिल्ली पुलिस की सबसे मारक टुकड़ी मानी जाने वाली 'स्पेशल सेल' में तैनात हैं। काउंटर टेररिज्म, गैंगस्टर नेटवर्क को नेस्तनाबूद करना और संगठित अपराध पर लगाम कसना उनकी विशेषज्ञता है। स्पेशल सेल के अंदर कई हाई-रिस्क ऑपरेशनों में उनके आक्रामक और आत्मविश्वासी नेतृत्व की मिसालें दी जाती हैं। धर्मपुर विवाद में भी उनका यही बेखौफ अंदाज देखने को मिला।

देश से लेकर विदेश तक फैला है ऑपरेशनों का जाल
ACP राहुल विक्रम की टीम ने देश के कई सबसे बड़े और खतरनाक मामलों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। उनके खाते में दर्ज कुछ प्रमुख कामयाबियां इस प्रकार हैं:
1. सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड: इस बहुचर्चित हत्याकांड के मास्टरमाइंड सचिन थापन को विदेश से प्रत्यर्पित कर भारत लाने में अहम भूमिका।
2. थाईलैंड ऑपरेशन: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कुख्यात गुर्गे काला राणा को थाईलैंड से दबोचकर भारत लाना।
3. काला जठेड़ी की गिरफ्तारी: लेडी डॉन अनुराधा और इनामी गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी को सलाखों के पीछे पहुंचाने वाले ऑपरेशन का हिस्सा।
4. अलकायदा नेटवर्क का पर्दाफाश: झारखंड से जुड़े अलकायदा के आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त करना उनकी टीम की बड़ी सफलताओं में गिना जाता है।

अधिकारों की जंग के केंद्र में
धर्मपुर का यह हाई-वोल्टेज पुलिसिया ड्रामा अब केवल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी का सामान्य मामला नहीं रह गया है। इस घटना ने राज्यों की पुलिस के अधिकार क्षेत्र, पूर्व सूचना के कानूनी प्रोटोकॉल और अंतरराज्यीय कार्रवाई की जटिलताओं पर एक राष्ट्रीय स्तर की बहस छेड़ दी है। इस पूरी प्रशासनिक और कानूनी जंग के बिलकुल केंद्र में खड़े ACP राहुल विक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फील्ड ऑपरेशन्स में उनकी आक्रामकता और अपनी ड्यूटी के प्रति उनका अडिग रवैया उन्हें एक अलग कतार में खड़ा करता है। एक बात तय है - आने वाले समय में यह टकराव पुलिसिंग के इतिहास में एक केस स्टडी के तौर पर देखा जाएगा, जिसमें 'स्पेशल सेल' के इस अफसर का नाम प्रमुखता से दर्ज होगा।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों और घटनास्थल से सामने आई सूचनाओं पर आधारित है। मामले की जांच जारी है, इसलिए तथ्यों में आधिकारिक अपडेट या बदलाव संभव है। हमार उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है, किसी व्यक्ति, संस्था या एजेंसी की छवि को प्रभावित करना नहीं।