राजधानी शिमला में 19 मार्च से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है और शहर भक्तिमय हो गया है। शहर के प्रमुख शक्तिपीठों—तारादेवी, कालीबाड़ी, बीसीएस तारामाता और ढींगू माता मंदिर में माता के स्वागत के लिए भव्य सजावट की गई है। इस वर्ष माता का आगमन 'डोली' पर हो रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद शुभ माना जा रहा है। पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जहां प्रशासन ने सुरक्षा और विशेष बसों (HRTC) के पुख्ता इंतजाम किए हैं, वहीं शहर में चल रहे गैस संकट को देखते हुए मंदिर समितियों ने भंडारे के लिए डीजल भट्ठियों और लकड़ियों जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित कर ली हैं।
चैत्र नवरात्र: शिमला में सजे माता के दरबार, गैस संकट के बावजूद नहीं रुकेगा भंडारा; जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूरी तैयारियां - पढ़ें विस्तार से..
शिमला (HD News); पहाड़ों की रानी शिमला में चैत्र नवरात्र को लेकर आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इस वर्ष नौ दिवसीय यह पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगा। राजधानी के प्रमुख शक्तिपीठों और मंदिरों, जिनमें तारादेवी, कालीबाड़ी, बीसीएस तारामाता मंदिर और ढींगू माता मंदिर शामिल हैं, में सजावट का काम अंतिम चरण में है। इस बार माता का आगमन 'डोली' पर हो रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद शुभ माना जा रहा है। पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समितियों और जिला प्रशासन ने सुरक्षा से लेकर परिवहन तक के पुख्ता इंतजाम कर लिए हैं।

ग्रहों का दुर्लभ संयोग और कलश स्थापना के दो विशेष मुहूर्त
गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार चैत्र नवरात्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होंगे। प्रतिपदा तिथि 19 मार्च की सुबह 6:54 बजे शुरू होगी और 20 मार्च को सुबह 4:51 बजे समाप्त होगी। इस वर्ष का नवरात्र कई मायनों में खास है क्योंकि इसमें राजयोग, सर्वार्थ सिद्धि योग और ब्रह्म योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही नवरात्र के पहले दिन मीन राशि में सूर्य, चंद्रमा, शनि और शुक्र का 'चतुर्ग्रही योग' भी रहेगा। घटस्थापना के लिए इस बार दो शुभ मुहूर्त तय किए गए हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6:54 बजे से 7:58 बजे तक रहेगा, जबकि कलश स्थापना का दूसरा 'अभिजीत मुहूर्त' दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा।
सुबह 6 बजे से होंगे दर्शन, सुरक्षा और परिवहन के पुख्ता इंतजाम
राजधानी के सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए सुबह 6:00 बजे ही खोल दिए जाएंगे। दर्शन और पूजा-पाठ का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो जाएगा। कालीबाड़ी मंदिर में सुबह 7:00 बजे के बाद घटस्थापना और विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी, जबकि ऐतिहासिक तारादेवी मंदिर में सुबह 11:00 बजे के बाद कलश स्थापना होगी। त्योहारी भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी मंदिरों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। तारादेवी मंदिर दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) शिमला के पुराने बस अड्डे से विशेष बसें भी चलाएगा, ताकि भक्तों को आवाजाही में कोई परेशानी न हो।
गैस संकट के बीच मंदिरों ने ढूंढा भंडारे का विकल्प
शिमला शहर में पिछले एक सप्ताह से गहराए व्यावसायिक गैस सिलेंडरों (LPG) के संकट का असर होटलों और रेस्तरां के साथ-साथ मंदिरों के भंडारों पर भी पड़ता दिख रहा है। हालांकि, मंदिर प्रबंधनों ने श्रद्धालुओं की आस्था को सर्वोपरि रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर ली हैं। तारादेवी मंदिर के प्रबंधक अनिल शांडिल ने बताया कि पहले से अंतिम नवरात्र तक चलने वाले दैनिक भंडारे के लिए लकड़ियों का पर्याप्त प्रबंध कर लिया गया है। वहीं, बीसीएस तारा माता मंदिर में भी हर रोज भंडारा लगेगा, जिसके लिए 5 डीजल भट्ठियों की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, शिमला कालीबाड़ी कार्य निर्वाहक समिति के सचिव डॉ. कल्लोल प्रमानिक ने बताया कि मंदिर में एलपीजी सिलेंडर का स्टॉक खत्म हो चुका है, लेकिन उम्मीद है जल्द व्यवस्था हो जाएगी। फिलहाल भक्तों के लिए हलवा प्रसाद बनाया जाएगा और अंतिम तीन दिन बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन होगा। प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई श्रद्धालु अपनी ओर से एलपीजी की व्यवस्था कर मंदिर में भंडारा या हलवा प्रसाद बनवाना चाहता है, तो वह सीधा संपर्क कर सकता है।

नौ दिन, देवी के नौ स्वरूपों की होगी आराधना
नवरात्र के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।
कुल मिलाकर, पहाड़ों की रानी शिमला चैत्र नवरात्र के इस नौ दिवसीय पावन पर्व के लिए पूरी तरह से तैयार है। एक तरफ जहां राजयोग और सर्वार्थ सिद्धि जैसे शुभ संयोग इस पर्व की महत्ता और फल को कई गुना बढ़ा रहे हैं, वहीं मंदिर समितियों की मुस्तैदी ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि एलपीजी गैस जैसी व्यावहारिक समस्याएं श्रद्धालुओं की आस्था और भंडारे के आड़े नहीं आएंगी। भक्त पूरे उत्साह, शांति और भक्ति-भाव के साथ माता के नौ स्वरूपों के दर्शन और प्रसाद का लाभ उठा सकेंगे।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई शुभ मुहूर्त, ग्रहों के योग और पूजा विधि की जानकारी स्थानीय पंडितों, पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। पंचांग के अनुसार समय और तिथियों में मामूली भिन्नता हो सकती है। इसके अलावा, बस सेवाओं के रूट और भंडारे की व्यवस्थाएं मंदिर प्रशासन व स्थानीय अधिकारियों के तात्कालिक निर्णयों के अधीन हैं। अतः दर्शन के लिए जाने से पूर्व संबंधित विभागों या मंदिर प्रबंधन से अद्यतन जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें।