हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन शुरू होने से पहले चौपाल क्षेत्र की जर्जर सड़कों, लंबित भुगतान और खरीद व्यवस्था को लेकर बागवानों की चिंता बढ़ गई है। जिला परिषद सदस्य अतुल शर्मा और क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सड़कों की तत्काल मरम्मत, समय पर भुगतान और सेब खरीद व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इस बार भी हजारों बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। पढ़ें विस्तार से ..
शिमला : (HD News); हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सेब कारोबार को लेकर सेब सीजन शुरू होने से पहले बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। एक ओर मौसम की अनिश्चितता का खतरा बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर चौपाल क्षेत्र सहित कई इलाकों में सड़कों की बदहाल स्थिति किसानों और बागवानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। इसी मुद्दे को लेकर जिला परिषद सदस्य चौपाल अतुल शर्मा और क्षेत्र के अन्य लोगों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सेब सीजन से पहले सभी आवश्यक तैयारियां युद्धस्तर पर पूरी करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के निचले क्षेत्रों में अगले 15 दिनों के भीतर सेब सीजन पूरी तरह शुरू होने वाला है, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक सड़कों की मरम्मत, परिवहन व्यवस्था और खरीद संबंधी तैयारियां पर्याप्त स्तर पर नहीं की गई हैं। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अतुल शर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष लंबे समय बाद बागवानों को अच्छी फसल मिली थी, लेकिन खराब सड़कें, विपणन व्यवस्था की कमियां और विभिन्न एजेंसियों की लापरवाही के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि HPMC के गोदामों में हजारों पेटियां सेब की सड़ गईं, जबकि मजबूरन बागवानों को 250 से 400 रुपये प्रति पेटी के बेहद कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ी। कई आढ़तियों द्वारा आज तक किसानों का भुगतान नहीं किया गया है और HPMC की ओर से भी पिछले सीजन का भुगतान अब तक लंबित है।

उन्होंने चौपाल-देहा मुख्य मार्ग पर 50 से 60 ऐसे पेड़ों का भी मुद्दा उठाया जो कभी भी गिरकर बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा देहा से करगोली नाला तक लगभग आठ किलोमीटर सड़क की वर्षों से मेटलिंग नहीं होने के कारण सड़क बेहद खराब हो चुकी है, जिससे सेब से लदी पिकअप गाड़ियों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा लगातार बना रहता है। पुलबाहल, सराहां, नेरी पुल और सोलन मार्ग की खराब स्थिति का भी उन्होंने प्रशासन के समक्ष उल्लेख किया।
जिला परिषद सदस्य ने सुझाव दिया कि इस बार केवल HPMC पर निर्भर रहने के बजाय हिमफैड सहित अन्य सरकारी एजेंसियों को भी सेब खरीदने की अनुमति दी जाए, ताकि खरीद व्यवस्था सुचारु रहे और पिछले वर्ष जैसी अव्यवस्था दोबारा न हो। उन्होंने बारिश के दौरान संपर्क मार्गों को शीघ्र बहाल करने के लिए पंचायतों को पहले से विशेष आपातकालीन फंड उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई।

उन्होंने यह भी कहा कि मंडियों में केवल लाइसेंसधारी व्यापारियों को ही सेब खरीदने की अनुमति दी जाए, ताकि गैर-लाइसेंसधारी खरीदार किसानों के साथ धोखाधड़ी न कर सकें। साथ ही सभी किसानों को सेब का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए तथा HPMC द्वारा लंबित भुगतान भी जल्द जारी किया जाए।
अतुल शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि सेब सीजन शुरू होने से पहले सड़कों की मरम्मत, भुगतान व्यवस्था और खरीद प्रणाली में आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो इस बार भी हजारों बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से बागवानों के हित में त्वरित कार्रवाई करने की मांग की।