हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इन दिनों सड़कों पर दुकान लगाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स (तहबाजारियों) और नगर निगम प्रशासन के बीच का गतिरोध बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। लक्कड़ बाजार, लोअर बाजार और मॉल रोड के आसपास अतिक्रमण हटाने के नाम पर की जा रही लगातार कार्रवाई और चालान काटने के विरोध में सोमवार को वेंडर्स का गुस्सा फूट पड़ा। सीटू (CITU) के बैनर तले एकजुट होकर तहबाजारी यूनियन ने जिला उपायुक्त (DC) कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। पिछले 9 दिनों से रोजगार पूरी तरह ठप होने के कारण परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। वेंडर्स का साफ कहना है कि वे 'आजीविका भवन' में शिफ्ट नहीं होंगे क्योंकि वहां ग्राहक नहीं आते; प्रशासन उन्हें किसी ऐसी जगह बसाए जहां उनका व्यापार चल सके।
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इन दिनों सड़कों पर दुकान लगाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स (तहबाजारियों) और नगर निगम प्रशासन के बीच का गतिरोध बेहद संवेदनशील और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले कई दिनों से लक्कड़ बाजार, लोअर बाजार और वीआईपी क्षेत्र मॉल रोड के आसपास अतिक्रमण हटाने के नाम पर की जा रही नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ सोमवार को वेंडर्स का गुस्सा फूट पड़ा। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के बैनर तले एकजुट होकर तहबाजारी यूनियन ने जिला उपायुक्त (डीसी) कार्यालय के बाहर विशाल और जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर उत्पीड़न का सीधा आरोप लगाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि उन्हें तुरंत सम्मानजनक और व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक स्थान नहीं दिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।

9 दिनों से रोजगार पूरी तरह ठप: परिवारों पर गहराया भुखमरी का साया
नगर निगम शिमला द्वारा पिछले कुछ दिनों से शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में अवैध तहबाजारियों के खिलाफ ताबड़तोड़ अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में दुकानदारों के चालान काटे गए हैं और उनका सामान जब्त कर लिया गया है। इस कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के चलते सैकड़ों वेंडर्स का रोजगार पिछले नौ दिनों से पूरी तरह से ठप हो गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नगर निगम की इस एकतरफा कार्रवाई ने उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है और कई घरों में तो चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है। सबसे बड़ा पेंच प्रशासन द्वारा तैयार 'आजीविका भवन' को लेकर फंसा हुआ है; वेंडर्स वहां शिफ्ट होने के लिए कतई तैयार नहीं हैं क्योंकि उनके अनुसार वह स्थान व्यावसायिक दृष्टिकोण से व्यावहारिक नहीं है और वहां ग्राहकों की आवाजाही न के बराबर है।
"बिना किसी संवाद के गरीबों पर प्रशासनिक चाबुक" – यूनियन अध्यक्ष पवन शर्मा
प्रदर्शन स्थल पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोअर बाजार तहबाजारी यूनियन के अध्यक्ष पवन शर्मा ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि निगम की टीमें बिना किसी पूर्व संवाद या बातचीत के सीधे गलियों में घुसकर गरीबों का सामान जब्त कर रही हैं, जिससे गरीब परिवारों की आजीविका छिन गई है। उन्होंने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वे शहर के रास्तों पर अवैध कब्जा करने के कतई इच्छुक नहीं हैं, बल्कि सिर्फ ऐसी जगह चाहते हैं जहां उनका रोजगार चल सके। यदि नगर निगम उन्हें किसी ऐसी सार्वजनिक जगह पर पुनर्स्थापित करता है जहां लोगों की आवाजाही नियमित रूप से होती हो, तो वे वहां जाने के लिए सहर्ष तैयार हैं।

स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा: तिब्बती मार्केट और सब्जी मंडी का दिया विकल्प
तहबाजारी यूनियन के उपाध्यक्ष ओम प्रकाश ने प्रशासनिक नीतियों में भेदभाव का एक बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि माननीय अदालत के आदेशों की आड़ लेकर केवल स्थानीय और वैध कार्डधारक तहबाजारियों को ही परेशान किया जा रहा है, जबकि शहर में अवैध रूप से सक्रिय बाहरी राज्यों के लोगों के खिलाफ कोई ठोस या प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने गतिरोध को सुलझाने के लिए प्रशासन को कुछ व्यावहारिक सुझाव भी दिए:
- सब्जी मंडी कॉम्प्लेक्स: सब्जी मंडी में निर्मित किए जा रहे नए कॉम्प्लेक्स में तहबाजारियों के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाए।
- पुरानी तिब्बती मार्केट: पुरानी तिब्बती मार्केट के क्षेत्र में वेंडर्स के लिए जगह आवंटित की जाए, जहां रोजगार चलने की संभावना हो।

उपाध्यक्ष ने कहा कि अगर इन स्थानों पर उन्हें जगह मिलती है, तो यूनियन खुशी-खुशी वहां शिफ्ट होने को तैयार है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच बड़े आंदोलन की चेतावनी
यूनियन नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने साफ लफ्जों में जिला प्रशासन और नगर निगम को आगाह किया है कि फिलहाल उनका यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण है। लेकिन इसे उनकी कमजोरी न समझा जाए। यदि नगर निगम प्रशासन ने उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया और उनके रोजगार को बहाल करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को बेहद उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

शिमला का यह वेंडर्स विवाद अब प्रशासनिक नियमों बनाम मानवीय संवेदनाओं और रोजी-रोटी की लड़ाई बन चुका है। एक तरफ नगर निगम शहर को व्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त करने के अदालती आदेशों का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ तहबाजारी बिना किसी व्यावहारिक विकल्प (जैसे सब्जी मंडी कॉम्प्लेक्स या पुरानी तिब्बती मार्केट) के हटने को तैयार नहीं हैं। यदि प्रशासन ने समय रहते संवाद के जरिए बीच का रास्ता नहीं निकाला और स्थानीय बनाम बाहरी वेंडर्स के भेदभाव को दूर नहीं किया, तो आने वाले दिनों में पर्यटन नगरी शिमला में यह गतिरोध एक बड़े कानून-व्यवस्था के संकट का रूप ले सकता है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट स्थानीय घटनाक्रमों, तहबाजारी यूनियन के पदाधिकारियों (अध्यक्ष पवन शर्मा एवं उपाध्यक्ष ओम प्रकाश) द्वारा दिए गए बयानों और प्राथमिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रशासनिक नीति को चुनौती देना या पूर्वाग्रह फैलाना नहीं, बल्कि जनता और संबंधित अधिकारियों तक ग्राउंड रियलिटी और दोनों पक्षों का दृष्टिकोण निष्पक्षता से पहुंचाना है।