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हिमाचल | शिमला

शिमला: आजीविका भवन में 'आजीविका' को तरसे विस्थापित कारोबारी, चौथे साल में प्रवेश करते ही फूटा गुस्सा - बोले - 30 साल की जमापूंजी किराए में चली गई - पढ़ें पूरी खबर..

July 14, 2026 03:35 PM
ओम प्रकाश ठाकुर

राजधानी शिमला में रिवोली रोड से विस्थापित कर आजीविका भवन में बसाए गए कारोबारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। कारोबारियों का दावा है कि पुनर्वास के करीब तीन साल बाद भी भवन में ग्राहक नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे उनका कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है और कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। विस्थापित व्यापारी संजू नेगी, शिव प्रकाश, अंजू शर्मा और मधु ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें ऐसी जगह बसाया गया, जहां आजीविका चलाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि अब वे दुकान का किराया चुकाने के लिए वर्षों की जमा-पूंजी खर्च करने को मजबूर हैं। कारोबारियों ने सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान करते हुए उन्हें उचित स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए। पढ़ें पूरी खबर..

शिमला: (HD News); शिमला में विकास और विस्थापन के नाम पर व्यापारियों को पुनर्स्थापित करने की प्रशासनिक योजनाएं जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। करीब तीन साल पहले ऐतिहासिक रिवोली रोड (Rivoli Road) से हटाकर नई बहुमंजिला इमारत (आजीविका भवन) में भेजे गए कारोबारियों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। आजीविका परिसर में विस्थापन का दंश झेल रहे इन दुकानदारों का अब यहाँ चौथा साल शुरू हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक दावों के उलट वे यहाँ अपनी बुनियादी आजीविका के लिए भी तरस रहे हैं। दुकानदारों का गंभीर आरोप है कि उन्हें एक ऐसी 'असुरक्षित, अव्यवस्थित और वीरान' इमारत में धकेल दिया गया है, जहां न तो ग्राहक पहुंच पा रहे हैं और न ही व्यापारियों की जान सुरक्षित है।

"पुरानी जमापूंजी से चल रहा भरण-पोषण"—आर्थिक तबाही की कगार पर कारोबारी

जो व्यापारी पिछले 30 से 50 वर्षों से रिवोली रोड पर सम्मानजनक ढंग से अपनी रोजी-रोटी कमा रहे थे, वे आज दाने-दाने को मोहताज हो चुके हैं। लाखों रुपये का कर्ज (Loan) लेकर इन नई दुकानों में निवेश करने वाले कारोबारियों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है।

स्थानीय पीड़ित व्यापारी सुनील नेगी ने बेहद भावुक और तीखे शब्दों में अपनी व्यथा बयां करते हुए कहा कि आजीविका भवन में आए हुए उन्हें चौथा साल लग गया है, लेकिन व्यापार ठप है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन दशकों (30 साल) में रिवोली रोड पर रहकर जो कुछ भी उन्होंने खून-पसीने से कमाया और बचाया था, आज उसी पुरानी जमापूंजी को खर्च करके वे अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं और इस वीरान पड़े भवन की दुकानों का भारी-भरकम किराया (रेंट) चुका रहे हैं।

इसी दर्द को आगे बढ़ाते हुए एक अन्य व्यापारी शिव प्रकाश ने बताया कि मंदी का आलम यह है कि दोपहर के ढाई बज जाते हैं, लेकिन बाजार में एक रुपये की बोहनी तक नहीं हो पाती। बाजार में शून्य फुटफॉल (Footfall) होने के कारण सभी छोटे-बड़े दुकानदार भारी मानसिक और आर्थिक अवसाद के दौर से गुजर रहे हैं।

बदहाल व्यवस्था और घटिया निर्माण के गंभीर आरोप

व्यापारी शिव प्रकाश ने इस बहुमंजिला इमारत की जमीनी हकीकत उजागर करते हुए प्रशासन और निर्माण विंग की गुणवत्ता पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

'मक्खन' की तरह ड्रिल होने वाले कमजोर पिलर: व्यापारियों का सबसे सनसनीखेज आरोप इमारत की मजबूती को लेकर है। कारोबारी शिव प्रकाश कहना है कि यह विशालकाय ढांचा आरसीसी (RCC) की असली मजबूती के बजाय कमजोर सामग्री और रेत के मलबे पर खड़ा किया गया है। आजीविका भवन में आजीविका को तरस रहे कारोबारी शिव प्रकाश ने HD News को बताया कि, "जब हमने यहाँ अपनी दुकानों में इंटीरियर का काम करवाया, तो पिलर में ड्रिल मशीन ऐसे जा रही थी मानो मक्खन में छुरी चल रही हो।" भूकंप की स्थिति में यह पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है।

चेतावनी के बावजूद चलाई पार्किंग, दरक गई छतें: निर्माण करने वाले ठेकेदार ने नगर निगम (MC) को पहले ही लिखित चेतावनी दी थी कि यह इमारत भारी वाहनों की पार्किंग के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बावजूद, यहाँ दो साल तक अवैध रूप से पार्किंग चलाई गई। नतीजा यह हुआ कि इमारत के लेंटर फट चुके हैं और छठी मंजिल की छत से लगातार पानी टपक रहा है।

🚫 बाजार नहीं, सरकारी दफ्तर जैसी बनावट; रास्ते भी पड़े हैं बंद इस आजीविका भवन की बनावट और भौगोलिक स्थिति भी इसके पूरी तरह फ्लॉप होने की मुख्य वजह है। व्यापारी सुनील नेगी ने तकनीकी खामी को उजागर करते हुए बताया कि दूर से देखने पर यह परिसर किसी भी कोण से कमर्शियल मार्केट नहीं लगता, बल्कि यह कोई सरकारी कार्यालय या नौकरी देने वाला दफ्तर (रोजगार कार्यालय) जैसा प्रतीत होता है। यही कारण है कि बाहर से आने वाले पर्यटकों और आम जनता को पता ही नहीं चल पाता कि अंदर कोई बाजार भी चल रहा है।

इसके साथ ही, लिफ्ट के पास उतरने वाले पर्यटक एचपी टूरिज्म (HP Tourism) के शेल्टर वाले रास्ते से होकर सीधे माल रोड की तरफ निकल जाते हैं, जिससे वे इस मार्केट तक पहुंच ही नहीं पाते। रही-सही कसर रास्तों की बदहाली ने पूरी कर दी है; सब्जी मंडी की तरफ से आने वाला मुख्य रास्ता बेहद संकरा है और दिन-रात व्यावसायिक वाहनों व पिकअप से घिरा रहता है। इसके अलावा, लिफ्ट की तरफ से आने वाले रास्ते पर स्थानीय होटलों ने अपने वाहनों की अवैध पार्किंग कर रखी है, जिससे ग्राहकों के आने-जाने का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है।

प्रशासन के दोहरे रवैये पर बड़ा सवाल

"हमें यह कहकर रिवोली रोड से बेदखल किया गया था कि वह 'सिंकिंग जोन' (Sinking Zone) है और वहां कोई निर्माण नहीं हो सकता। लेकिन आज हमारी आंखों के सामने उसी पुरानी जगह पर नए व्यावसायिक स्टॉल और बड़ी इमारतें खड़ी की जा रही हैं। अगर वह जगह हमारे लिए असुरक्षित थी, तो आज वहां हो रहे नए निर्माण किसके शह पर और किसके फायदे के लिए हो रहे हैं?"

संकट से उबरने के लिए व्यापारियों का व्यावहारिक सुझाव

व्यापारियों की पुरानी जगह पर सम्मानजनक वापसी: कमर्शियल दृष्टिकोण से पूरी तरह विफल हो चुके इस आजीविका भवन से दुकानदारों को मुक्त किया जाए। पीड़ित दुकानदारों (सुनील नेगी, शिव प्रकाश व अन्य) को उनके मूल स्थान (रिवोली रोड) पर सम्मानजनक तरीके से दोबारा स्थापित किया जाए, जहां वे दशकों से सुरक्षित और आत्मनिर्भर तरीके से अपना व्यापार चला रहे थे।

प्रशासनिक अनदेखी और आर्थिक तबाही के इस गंभीर मुद्दे पर आजीविका भवन की अन्य महिला कारोबारियों  अंजू शर्मा और मधु ने भी संजू नेगी व शिव प्रकाश द्वारा लगाए गए सभी ढांचागत और व्यावहारिक आरोपों का पुरजोर समर्थन किया है। इन महिला व्यापारियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि भवन के असुरक्षित पिलर्स, मलबे पर टिकी खतरनाक सीढ़ियों, बंद रास्तों और शून्य फुटफॉल के कारण इस वीरान परिसर में दुकानें खोलना अब एक मानसिक प्रताड़ना बन चुका है, जहां दिन-भर इंतजार के बाद भी एक रुपये की बोहनी तक नसीब नहीं हो रही। अंजू शर्मा और मधु सहित सभी प्रभावित दुकानदारों ने प्रशासन के इस दोहरे रवैये के खिलाफ एकजुट होकर सरकार से गुहार लगाई है कि इस अव्यावहारिक इमारत को तुरंत खाली करवाकर अन्य सरकारी दफ्तरों के लिए स्थानांतरित किया जाए और उन्हें बिना किसी देरी के उनके मूल स्थान रिवोली रोड पर सम्मानजनक तरीके से वापस बसाया जाए ताकि वे आजीविका भवन से अपनी दम तोड़ती आजीविका को बचा सकें।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस समाचार रिपोर्ट में प्रकाशित विचार, दावे और आरोप पूरी तरह से आजीविका भवन के स्थानीय प्रभावित व्यापारियों और उपलब्ध स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। 'HD News' (himdarshan.com) निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करता है और इसका उद्देश्य किसी भी सरकारी विभाग, नगर निगम शिमला, प्रशासन या किसी व्यक्ति विशेष की छवि को ठेस पहुँचाना नहीं है। इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य विस्थापित कारोबारियों की व्यावहारिक समस्याओं, सुरक्षा चिंताओं के सभी पहलुओं को जनहित में सरकार व प्रशासन के सामने लाना है।

हालांकि प्रशासन का तर्क है कि जनता और खुद व्यापारियों की सुरक्षा के लिए उन्हें 'सिंकिंग जोन' (रिवोली रोड) से हटाकर करोड़ों की लागत से बने इस आधुनिक व स्थाई परिसर में पुनर्स्थापित किया गया है।

💬 आपकी क्या राय है? क्या प्रशासन को बाजार में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए या इस इमारत का कोई अन्य व्यावहारिक उपयोग होना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें।

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