हिमाचल प्रदेश में कॉम्प्लेक्स सिस्टम को लेकर शिक्षक और सरकार आमने-सामने आ गए हैं। शिमला के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में हजारों प्राथमिक शिक्षकों ने महाधरना देकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता विफल रहने के बाद शिक्षक संघ ने आज से अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू करने का ऐलान कर दिया है। आखिर क्या हैं शिक्षकों की प्रमुख मांगें और सरकार पर क्यों बढ़ा दबाव? देखिए हमारी यह विशेष रिपोर्ट..
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर शिक्षक और सरकार के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर प्रदेशभर से हजारों शिक्षक शिमला के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में जुटे और सरकार द्वारा लागू किए गए न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम के खिलाफ जोरदार महाधरना दिया। मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद शिक्षक संघ ने आंदोलन को और तेज करते हुए आज से अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू करने का ऐलान कर दिया है।

शिक्षक संघ ने दो टूक कहा है कि जब तक न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम की अधिसूचना वापस नहीं ली जाती और लंबित मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि 15 दिनों की पैदल यात्रा के बाद चौड़ा मैदान में उमड़ा शिक्षकों का जनसैलाब इस बात का स्पष्ट संदेश है कि प्रदेश का प्राथमिक शिक्षक इस नई व्यवस्था को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और शिक्षा विभाग नई भर्तियां करने से बचने के लिए कॉम्प्लेक्स सिस्टम लागू कर रहे हैं, जिससे पहले से ही स्टाफ की भारी कमी झेल रहे शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार थोपने की तैयारी है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में जेबीटी शिक्षकों के पांच हजार से अधिक पद रिक्त हैं, नर्सरी शिक्षकों की भर्ती वर्षों से लंबित है और प्राथमिक स्कूलों में करीब 50 प्रतिशत स्टाफ की कमी बनी हुई है। ऐसे हालात में कॉम्प्लेक्स सिस्टम लागू करना शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बजाय और अधिक कमजोर करेगा।
रमेश शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में सरकार ने एक समिति बनाकर सुझाव लेने की बात कही, लेकिन शिक्षक संघ अब केवल आश्वासनों पर भरोसा करने को तैयार नहीं है। उनका कहना था कि पहले भी शिक्षा मंत्री की ओर से मांगें पूरी करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन न तो कोई मांग पूरी हुई और न ही शिक्षकों की समस्याओं का समाधान निकला।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि महाधरने के बाद शुरू हो रहा अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार अधिसूचना वापस लेकर शिक्षकों की मांगों पर ठोस फैसला नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो यह आंदोलन 2027 के विधानसभा चुनाव तक भी जारी रखा जाएगा।
शिक्षकों के इस बड़े आंदोलन ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार शिक्षक संघ की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और गतिरोध कब तक समाप्त होता है।
