बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में आज दीपावली का त्योहार अद्भुत और अद्वितीय रूप से मनाया जा रहा है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को आज क्विंटल गेंदे और गुलाब के फूलों से सजाया गया है। आज के दिन बाबा विश्वनाथ के साथ-साथ मंदिर परिसर में स्थित माता अन्नपूर्णा और विशेष रूप से कुबेर व महालक्ष्मी का पूजन-अर्चन किया गया। स्वर्णमंडित शिखरों वाले इस भव्य देवालय की आभा आज रात देखने लायक थी।

मान्यता है कि काशी में दीपावली के दिन मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की विशेष साधना करने से पूरे वर्ष घर-परिवार में अन्न और धन की कमी नहीं होती। आज मंदिर के गर्भगृह में भोर की मंगला आरती के बाद से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। न्यास समिति द्वारा दीपावली के पावन पर्व पर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी ताकि हर कोई आसानी से बाबा और लक्ष्मी-गणेश के दर्शन कर सके।
शाम के वक्त काशी के गंगा घाटों पर दीपोत्सव का एक और अलौकिक नजारा देखने को मिला। दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर विशेष 'महालक्ष्मी दीपावली आरती' का आयोजन किया गया। गंगा सेवा निधि और अन्य संस्थाओं के आचार्यों ने मिलकर भव्य 11 और 21 दीयों वाली आरतियों से मां गंगा की वंदना की। घाट की सीढ़ियों पर स्थानीय लोगों और देश-विदेश से आए पर्यटकों ने मिलकर लाखों मिट्टी के दीये जलाए, जिससे गंगा की लहरों पर दीपों की परछाईं झिलमिलाने लगी।
इस अवसर पर पूरे शहर में उत्सव का माहौल है। विश्वनाथ धाम के चौक और कॉरिडोर क्षेत्र को विशेष रूप से देशी-विदेशी फूलों की लड़ियों और पारंपरिक दीपों से सजाया गया है। काशी के नागरिकों ने अपने घरों के बाहर 'आकाशदीप' जलाकर पूर्वजों को याद किया और सुख-शांति की कामना की। सुरक्षा बलों और पुलिस की कड़ी निगरानी में पूरा दीपोत्सव शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हो रहा है।