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'मुफ्त में सब मिलेगा तो काम कौन करेगा?' फ्री की योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सरकारों को कड़ी फटकार - पढ़ें पूरी खबर

February 20, 2026 12:58 PM
Om Prakash Thakur

देश में चुनाव जीतने के उद्देश्य से मुफ्त की रेवड़ियां (Freebies) बांटने वाली सरकारों को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने 'फ्री' की संस्कृति की तीखी आलोचना करते हुए एक बेहद अहम सवाल उठाया है कि "अगर लोगों को मुफ्त में बिजली, साइकिल और खाना मिलेगा, तो कोई काम क्यों करेगा और फिर कार्य संस्कृति का क्या होगा?" कोर्ट ने सरकारों को स्पष्ट नसीहत दी है कि वे जनता को खैरात बांटने के बजाय रोजगार देने पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि समर्थ लोगों पर सरकारी खजाना लुटाना देश के आर्थिक विकास में बड़ी बाधा है। पढ़ें विस्तार से..

नई दिल्ली: (HD News); देश में चुनाव जीतने के लिए मुफ्त की रेवड़ियां बांटने वाली सरकारों को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने मुफ्त सुविधाएं (फ्रीबी) देने की संस्कृति की तीखी आलोचना करते हुए सरकारों को सख्त नसीहत दी है कि वे जनता को खैरात बांटने के बजाय रोजगार देने पर ध्यान केंद्रित करें। सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद तल्ख और अहम सवाल पूछते हुए कहा कि अगर लोगों को मुफ्त भोजन, साइकिल और बिजली मिलने लगेगी, तो कोई काम क्यों करेगा और फिर देश की 'कार्य संस्कृति' का क्या होगा? अदालत ने स्पष्ट किया कि जो लोग वास्तव में बिल चुकाने में असमर्थ हैं, उन्हें कल्याणकारी कदम के तहत मुफ्त सुविधाएं देना समझ में आता है, लेकिन जो लोग खर्च वहन कर सकते हैं, उन्हें भी बिना किसी भेदभाव के मुफ्त सुविधाएं देना स्पष्ट रूप से राजनीतिक तुष्टिकरण की नीति है।

कोर्ट ने गहरी चिंता जताते हुए पूछा कि हम देश में कैसी संस्कृति विकसित कर रहे हैं? न्यायमूर्तियों ने सख्त लहजे में कहा कि जरूरतमंदों को सुविधा देना ठीक है, लेकिन समर्थ लोगों पर सरकारी खजाना लुटाना पूरी तरह से गलत है और देश के आर्थिक विकास में बाधा डालने वाली इन नीतियों पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है। राजनीतिक दलों की मंशा पर सीधा प्रहार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि ऐसी मुफ्त योजनाओं की घोषणा चुनाव से ठीक पहले ही क्यों की जाती है? अदालत ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों और समाजशास्त्रियों को अपनी इस विचारधारा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है कि आखिर खजाने पर बोझ डालने वाला यह सब कब तक चलता रहेगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि उनकी यह चिंता केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख तमिलनाडु सरकार द्वारा मुफ्त बिजली देने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अदालत ने अब केंद्र और अन्य को नोटिस भी जारी कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी देश के सभी राजनीतिक दलों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के लिए सरकारी खजाने का अंधाधुंध दुरुपयोग बंद होना चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि जरूरतमंदों की मदद करना कल्याणकारी कदम है, लेकिन बिना भेदभाव के सभी को मुफ्त सुविधाएं देना गलत है। तमिलनाडु सरकार की मुफ्त बिजली योजना से जुड़ी याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी कर अदालत ने यह कड़ा संदेश दे दिया है कि राजनीतिक दलों और समाजशास्त्रियों को अपनी इस 'फ्रीबी' विचारधारा पर अब गंभीरता से पुनर्विचार करना ही होगा।

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