दलाल स्ट्रीट पर आज खौफ का साया मंडराता दिखा। भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर 'ब्लडबाथ' (रक्तपात) की स्थिति पैदा हो गई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी आज औंधे मुंह गिरकर बंद हुए। महज चंद घंटों के कारोबारी सत्र में ही निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए, जिससे बाजार में हाहाकार की स्थिति है।
इस भीषण गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार हो रही बेतहाशा बिकवाली है। चीन के बाजार में आए नए स्टिमुलस पैकेज के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर ड्रैगन की ओर मोड़ना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कोई कटौती न किए जाने की जिद ने भी बाजार के सेंटिमेंट को बुरी तरह कुचल दिया है।
हालांकि, इस चौतरफा मारकाट के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और खुदरा निवेशकों (रिटेलर्स) ने बाजार को संभालने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन विदेशी फंड्स की सुनामी के आगे उनकी एक न चली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तो ऐसी भगदड़ मची है कि कई मजबूत कंपनियों के शेयर भी ताश के पत्तों की तरह ढह गए। बाजार का हर सेक्टर आज लाल निशान में गोते लगाता नजर आया।
बाजार के दिग्गज विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य 'करेक्शन' नहीं है, बल्कि एक गहरे संकट की शुरुआत हो सकती है। अगर विदेशी निवेशकों का यह मोहभंग जारी रहा, तो आने वाले हफ्तों में निफ्टी अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को भी तोड़ सकता है। विशेषज्ञों ने छोटे निवेशकों को चेतावनी दी है कि वे गिरते बाजार में 'छुरी पकड़ने' की गलती न करें और फिलहाल नकदी बचाकर रखने में ही समझदारी दिखाएं।