हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के आठवें दिन APMC शिमला-किन्नौर द्वारा 70 दुकानों के आबंटन का मुद्दा गरमा गया। विपक्ष ने सरकार पर गंभीर धांधली और भाई-भतीजावाद के आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच की मांग की। कृषि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा किया और वॉकआउट कर दिया। पढ़ें विस्तार से..
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के आठवें दिन विपक्ष ने शिमला एवं किन्नौर की APMC (एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी) द्वारा 70 दुकानों के आबंटन में धांधली के आरोप लगाए। विपक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए आबंटन प्रक्रिया की न्यायिक जांच की मांग की।
विपक्षी दल के विधायक रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार ने कम किराए पर अपने चहेतों को दुकानें आबंटित की हैं और मामले को दबाने के लिए संबंधित अधिकारियों के तबादले कर दिए गए। वहीं, कृषि मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि APMC ने 70 दुकानों का आबंटन पूरी तरह नियमों के तहत किया है और विपक्ष बेबुनियाद बातें फैला रहा है।
जवाब से असंतुष्ट विपक्षी दल ने सदन में हंगामा किया और बाद में वॉकआउट कर दिया।

नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि दुकानों के आबंटन में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि जब सदन में यह मामला उठाया गया तो मंत्री जांच करवाने के बजाय आबंटन को सही ठहराने लगे, जबकि कम किराए पर दुकानें अपने लोगों को दे दी गईं।
भाजपा विधायकों रणधीर शर्मा और बलबीर सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि APMC में भाई-भतीजावाद हुआ है। उन्होंने कहा कि पराला सब्जी मंडी में मात्र ₹5, 000 किराए पर दुकानें आबंटित की गईं, जबकि 10 साल पहले ये दुकानें ₹50, 000 से ₹80, 000 किराए पर दी जाती थीं। उनका कहना था कि सरकार जांच से बच रही है, लेकिन अगर न्यायिक जांच होती है तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि दुकानों के अलावा पराला CA स्टोर और फूड प्रोसेसिंग प्लांट में भी बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। विपक्ष ने चेतावनी दी कि अगर भाजपा की सरकार बनी तो इन सभी मामलों की गहन जांच करवाई जाएगी।