हिमाचल प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर कहर बरपाया है। 24 से 26 अगस्त तक हुई मूसलधार बारिश और बादल फटने की घटनाओं से राज्य में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। भूस्खलन, सड़क धंसने और नदियों में बाढ़ आने से लोक निर्माण विभाग को अब तक 1444 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा है। सबसे ज्यादा असर सड़कों और पुलों पर देखने को मिला है, जिससे आम लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो गई है। पढ़ें विस्तार से.
शिमला (HD News): हिमाचल प्रदेश में 24 से 26 अगस्त तक हुई मूसलधार बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने प्रदेश में भारी तबाही मचाई है। जगह-जगह भूस्खलन, नदियों में बाढ़ और सड़कों के धंसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने जानकारी दी कि केवल तीन दिनों में ही प्रदेश को 158 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त
बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश की 1091 सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई हैं। वहीं, 7 पुल टूट गए और 2 पुल पूरी तरह बह गए हैं। राहत व बहाली कार्यों के लिए विभाग ने 912 मशीनें तैनात की हैं।
कुल्लू और कांगड़ा में सबसे ज्यादा नुकसान
कुल्लू जिले में करीब 30 करोड़ का नुकसान हुआ है। मनाली को पुरानी मनाली से जोड़ने वाला मनालसू पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। जिले में करीब 257 किलोमीटर सड़क नेटवर्क प्रभावित हुआ है, जिसमें से 10 किलोमीटर सड़क बह गई। कांगड़ा जिले में भी 30 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है।
पूरे मानसून का आंकड़ा
मंत्री ने बताया कि पूरे मानसून सीजन में अब तक लोक निर्माण विभाग को 1444.56 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें 5667 किलोमीटर सड़कें और 70 पुल प्रभावित हुए हैं। हालांकि विभाग ने मशीनरी और श्रमिक लगाकर राहत कार्य शुरू कर दिए हैं और कई सड़कें अस्थायी रूप से खोल दी गई हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश से बहाली का काम प्रभावित हो रहा है।

हिमाचल प्रदेश में मानसून से तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सरकार और विभागीय मशीनरी लगातार राहत व बहाली कार्यों में जुटी है, लेकिन लगातार बारिश से मुश्किलें और बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने में समय लगेगा। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।