69वें राष्ट्रमंडल अंतरराष्ट्रीय संसदीय सम्मेलन में हिस्सा लेने दक्षिण अफ्रीका गए हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया अपने आधिकारिक अध्ययन प्रवास के अगले चरण में नॉर्वे पहुंच गए हैं। फिनलैंड के रोवानीमी शहर का दौरा करने के बाद वह गत शाम नॉर्वे के प्रमुख शहर ट्रॉम्सो पहुंचे, जहां उनका दो दिवसीय प्रवास कार्यक्रम निर्धारित है। पढ़ें पूरी खबर..
HD News : 69वें राष्ट्रमंडल अंतरराष्ट्रीय संसदीय सम्मेलन में भाग लेने दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन गए हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया अपने आधिकारिक अध्ययन प्रवास के अगले चरण में नॉर्वे पहुंच गए हैं। फिनलैंड के मशहूर शहर रोवानीमी का दौरा करने के बाद पठानिया गत शाम नॉर्वे के प्रमुख शहर ट्रॉम्सो पहुंचे। यहां उनका दो दिवसीय प्रवास कार्यक्रम निर्धारित है।

विधानसभा अध्यक्ष 30 सितंबर, 2026 तक नॉर्वे के अध्ययन प्रवास पर ही रहेंगे। इस दौरान उनके कई ऐतिहासिक और प्रसिद्ध महानगरों में जाने का कार्यक्रम है। नॉर्वे के उत्तरी भाग में स्थित ट्रॉम्सो एक बेहद खूबसूरत और महत्वपूर्ण शहर है, जिसे अक्सर 'आर्कटिक की राजधानी' भी कहा जाता है। आर्कटिक सर्कल के काफी उत्तर में बसा यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बर्फीले वातावरण, 'नॉर्दर्न लाइट्स' (उत्तरी रोशनी) और समृद्ध सांस्कृतिक जीवन के लिए दुनियाभर के पर्यटकों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
ट्रॉम्सो की भौगोलिक स्थिति इसे नॉर्वे के अन्य शहरों से एक अलग पहचान देती है। सर्दियों के मौसम में यहां लंबे समय तक सूर्य दिखाई नहीं देता, जिसे 'ध्रुवीय रात्रि' (Polar Night) कहा जाता है। इसके ठीक विपरीत, गर्मियों के दिनों में यहां कई सप्ताह तक सूर्य अस्त ही नहीं होता। प्रकृति के इस अद्भुत नजारे को 'मध्यरात्रि का सूर्य' (Midnight Sun) कहा जाता है।

पर्यटन के साथ-साथ ट्रॉम्सो शिक्षा और अनुसंधान का भी एक बड़ा केंद्र है। यहां स्थित 'यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रॉम्सो - द आर्कटिक यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्वे' आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े अध्ययन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। अपने प्रवास के दौरान विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया इस विश्वविद्यालय का विशेष दौरा करेंगे। वहां वे भारतीय समुदाय के छात्रों के साथ सीधा संवाद करेंगे और नॉर्वे की मौजूदा शिक्षा पद्धति का बारीकी से अध्ययन करेंगे।
अपने इस महत्वपूर्ण अध्ययन प्रवास के दौरान पठानिया वहां के शिक्षाविदों के साथ जलवायु परिवर्तन, समुद्री विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और आर्कटिक समाज जैसे गंभीर और वैश्विक विषयों पर भी विस्तृत चर्चा करेंगे।
